बहुदा यात्रा 2025: श्रीमंदिर की ओर घर वापसी का पावन पर्व
Lord Jagannath return journey: पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने बहुदा यात्रा 2025 के लिए पूजा और अनुष्ठानों का पूरा कार्यक्रम जारी कर दिया है।बतादे की इस दिन भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा गुंडिचा मंदिर से श्रीमंदिर की ओर अपनी वापसी यात्रा करते हैं। यह यात्रा श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न होती है। लाखों श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन का साक्षी बनने पुरी पहुंचते हैं।
ऐसी रहेगी पूजा की विधि,सुबह 4 बजे से शुरू होंगे अनुष्ठान
पूरे आयोजन की शुरुआत सुबह 4:00 बजे मंगला आरती से होगी। इसके बाद क्रमशः मैलम, तड़प लागी, रोशा होम, अबकाश और सूर्य पूजा जैसे पारंपरिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे। सेनापता लागी और मंगलार्पण जैसे विशेष अनुष्ठानों के बाद दोपहर 12:00 बजे से बहुदा पहंड़ी यानी वापसी जुलूस की औपचारिक शुरुआत होगी। शाम 4:00 बजे तीनों रथों को खींचने की रस्म के साथ उत्सव अपने चरम पर पहुंचेगा।
बहुदा यात्रा का धार्मिक महत्व
बहुदा यात्रा रथयात्रा के नौवें दिन मनाई जाती है, जब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी अपने मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) से लौटकर श्रीमंदिर आते हैं। ‘बहुदा’ का अर्थ होता है ‘वापसी’। मान्यता है कि इस दिन रथ खींचने से न केवल सौभाग्य की प्राप्ति होती है, बल्कि भक्त जन्म-मरण के चक्र से भी मुक्ति पा सकते हैं। यह अवसर आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है।
छेरा पहंरा: गजपति महाराज की विनम्र भक्ति
बहुदा यात्रा के दौरान सबसे विशेष रस्मों में से एक है ‘छेरा पहंरा’। इसमें ओडिशा के गजपति महाराज स्वयं हाथ में झाड़ू लेकर रथ के चारों ओर सफाई करते हैं। यह भगवान के प्रति उनकी विनम्रता और सेवा भाव को दर्शाता है। यह परंपरा यह बताती है कि भगवान के सामने हर कोई समान है – चाहे वह राजा हो या सामान्य भक्त।
दिव्य अनुभव: रथ खींचना भक्तों के लिए आत्मिक सौभाग्य
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को देखने और रथ खींचने की लालसा लिए हजारों श्रद्धालु सुबह से ही लाइन में लगते हैं। उमस, धूप और बारिश की परवाह किए बिना वे घंटों तक इंतजार करते हैं। उनके लिए यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि भगवान से जुड़ने का एक आत्मिक अनुभव होता है। लोग मानते हैं कि इस सेवा से उनके पाप कट जाते हैं और भगवान की कृपा उन्हें प्राप्त होती है।
