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Brihaspativar Vrat Katha: गुरुवार व्रत करने से मिलता है बृहस्पतिदेव का आशीर्वाद, पढ़ें पौराणिक कथा...

By : Hema Gupta
Brihaspativar Vrat Katha: गुरुवार व्रत करने से मिलता है बृहस्पतिदेव का आशीर्वाद, पढ़ें पौराणिक कथा...
Brihaspativar Vrat Katha: भारत में हिंदु संस्कृति में हफ्ते के सातो दिन किसी न किसी देवी - देवताओं का विशेष दिन होता है, इसमें से गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और बृहस्पतिदेव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ बृहस्पतिवार व्रत कथा सुनना या पढ़ना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि लगातार 7 गुरुवार व्रत करने से कुंडली का गुरु दोष समाप्त हो सकता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। Read More: Janmashtami Bhog Lord Krishna: जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए लगाएं इन चीजों का भोग…

गुरुवार व्रत की शुरुआत और नियम...

1. जिस गुरुवार को अनुराधा नक्षत्र हो, उस दिन से व्रत शुरू करना शुभ माना जाता है। 2. व्रत के दिन पीले वस्त्र पहनना, पीले फूल, गुड़-चना और भगवान विष्णु को पीली वस्तुओं का भोग लगाना चाहिए। 3. कथा के अंत में प्रसाद और चरणामृत ग्रहण कर परिवार और कथा सुनने वालों को भी बांटना चाहिए।

व्यापारी और उसकी पत्नी की कहानी...

पत्नी का कंजूस स्वभाव..

एक नगर में एक बड़ा व्यापारी था, जो विदेशों में व्यापार करके बहुत धन कमाता था और दान भी करता था। लेकिन उसकी पत्नी अत्यंत कंजूस थी। एक दिन बृहस्पतिदेव साधु का भेष धारण करके उसके घर पहुंचे और भिक्षा मांगी। पत्नी ने उल्टा उपाय पूछा कि सारा धन कैसे नष्ट हो जाए।

बृहस्पतिदेव का उपाय...

बृहस्पतिदेव ने कहा— "यदि तुम धन नष्ट करना चाहती हो तो गुरुवार को घर गोबर से लीपना, पीली मिट्टी से बाल धोना, पति को हजामत कराना, कपड़े धोना और मांस-मदिरा का सेवन करना।" पत्नी ने ऐसा ही किया और केवल 3 गुरुवार में ही सारा धन खत्म हो गया। बाद में उसकी मृत्यु हो गई।

व्यापारी की कठिनाइयां और बृहस्पतिदेव का आशीर्वाद...

गरीबी और भूख...

व्यापारी विदेश से लौटकर आया तो सब कुछ बर्बाद मिला। वह अपनी बेटी के साथ दूसरे नगर में बस गया और लकड़ी बेचकर गुजारा करने लगा। एक दिन बेटी ने दही मांगा, लेकिन पैसे नहीं थे। उसी दिन बृहस्पतिवार था और जंगल में बैठकर व्यापारी रो रहा था।

कथा सुनने का फल...

बृहस्पतिदेव साधु बनकर प्रकट हुए और गुरुवार व्रत करने को कहा। व्यापारी ने व्रत किया, कथा सुनी, प्रसाद बांटा और कठिनाइयाँ दूर होने लगीं। लेकिन एक बार वह व्रत करना भूल गया।

जेल में चमत्कार...

राजा का शक और कैद...

अगले दिन राजा ने भोज दिया और व्यापारी को बुलाया। भोज के बाद रानी का हार गायब हो गया और शक व्यापारी पर आया। उसे बेटी सहित जेल में डाल दिया गया।

कथा का प्रभाव...

जेल में व्यापारी ने बृहस्पतिदेव का स्मरण किया। उन्हें दो पैसे मिले, जिनसे गुड़-चना खरीदा और कथा सुनी। प्रसाद और चरणामृत के प्रभाव से एक महिला का मृत बच्चा जीवित हो गया।

निष्कर्ष और आशीर्वाद...

राजा को सपने में बृहस्पतिदेव ने सच बताया कि व्यापारी निर्दोष है और हार उसी खूंटी पर है। सुबह राजा ने हार वहीं पाया और व्यापारी को सम्मान सहित रिहा किया। बेटी का विवाह धूमधाम से कराया और उन्हें धन-सम्पत्ति दी।  

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