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सुरक्षाबलों ने ‘ह्यूमन GPS’ बागू खान को ढेर कर दिया
कभी-कभी एक खबर दिल को सुकून देती है, लेकिन साथ ही उन सालों का दर्द भी याद दिलाती है जो दहशत में गुजरे। जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में गुरेज सेक्टर की ठंडी हवाएं, जहां नियंत्रण रेखा (LoC) पर सन्नाटा अक्सर गोलियों की गूंज से टूटता है। यहीं पर, 28 अगस्त को, हमारे बहादुर सुरक्षाबलों ने एक ऐसे शख्स को मार गिराया, जो 25 सालों से कश्मीर की शांति का दुश्मन था। नाम था बাগू खान, लेकिन लोग उसे ‘ह्यूमन GPS disagio’ कहते थे, क्योंकि वो आतंकियों को सीमा पार से लाने का माहिर था। समंदर चाचा के नाम से भी मशहूर, ये हिजबुल मुजाहिदीन का मोस्ट वांटेड आतंकी था। उसकी मौत की खबर सुनकर उन परिवारों के चेहरों की राहत की कल्पना कीजिए, जिन्होंने आतंक की आग में अपनों को खोया है।
बागू खान: दहशत का दूसरा नाम
मुझे याद है, एक बार कश्मीर के एक गांव में एक बुजुर्ग से बात हुई थी। वो रातों के डर का जिक्र करते हुए कहते थे, “जब घुसपैठ की खबरें आती हैं, नींद उड़ जाती है।” बागू खान वैसी ही छाया था – बिना दिखे दहशत फैलाने वाला। सूत्रों के मुताबिक, वो 1995 से पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में छुपा हुआ था। 25 सालों में उसने 100 से ज्यादा घुसपैठ की साजिशें रचीं। सोचिए, एक इंसान कितनी तबाही मचा सकता है! वो आतंकियों को रास्ता दिखाता, हथियार मुहैया कराता, और कश्मीर की वादियों को खून से रंगने की साजिश रचता। लेकिन अब उसकी कहानी खत्म हो चुकी है।
गुरेज की जंग: जवानों की बहादुरी
28 अगस्त की रात, गुरेज सेक्टर के नौशेरा नार इलाके में, खुफिया जानकारी मिली कि बागू खान अपने एक साथी के साथ घुसपैठ की कोशिश कर रहा है। भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिलकर जॉइंट ऑपरेशन शुरू किया। आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, लेकिन हमारे जवान डटे रहे। मुठभेड़ में बागू खान और उसका साथी मारा गया। दूसरे आतंकी की पहचान अभी नहीं हो पाई, लेकिन दोनों के शव बरामद हो चुके हैं। सेना ने X पर इस ऑपरेशन की जानकारी शेयर की, और ये पढ़कर गर्व हुआ कि हमारे सैनिक कितने मुश्किल हालात में भी देश की हिफाजत करते हैं।
पहलगाम से अब तक: आतंक पर करारा प्रहार
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए दिल दहलाने वाले हमले के बाद से, जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों ने आतंकियों के खिलाफ जंग तेज कर दी है। तब से अब तक 7 मुठभेड़ों में 23 आतंकी ढेर हो चुके हैं। इनमें 12 पाकिस्तानी और 9 स्थानीय आतंकी थे। हर मुठभेड़ एक कहानी है – बहादुरी की, बलिदान की।

– कुलगाम में ऑपरेशन अखल: 1 से 12 अगस्त तक, श्रीनगर से 70 किमी दूर कुलगाम में लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकी मारे गए – जाकिर अहमद गनी, आदिल रहमान डेंटू, और हरीश डार। ये स्थानीय थे, लेकिन गलत रास्ते पर चल पड़े।
– पुंछ में ऑपरेशन शिवशक्ति: 30 जुलाई को दो पाकिस्तानी लश्कर आतंकी ढेर, जो हाल ही में PoK से घुसे थे।
– हरवान में ऑपरेशन महादेव: 28 जुलाई को श्रीनगर के मुलनार गांव में तीन पाकिस्तानी आतंकी – सुलेमान, अफगान, और जिबरान – मारे गए। गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि ये पहलगाम हमले के गुनहगार थे।
– पुलवामा, शोपियां, और सांबा: मई से अगस्त तक, इन जगहों पर जैश और लश्कर के 13 आतंकी मारे गए। सांबा में 8-9 मई को बीएसएफ ने जैश के 7 पाकिस्तानी आतंकियों को ढेर किया।
ऑपरेशन सिंदूर: आतंक का सफाया
7 मई की रात, जब घड़ी में डेढ़ बजा, भारतीय सेना ने PoK में 9 आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की। लश्कर का हेडक्वॉर्टर, जैश के मसूद अजहर का ठिकाना – सब तबाह। 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए। ये सुनकर सुकून तो मिला, लेकिन मन में सवाल भी उठता है – कितने मासूमों की जानें बच सकती थीं, अगर ये पहले हो जाता?

कश्मीर की असली जीत
बागू खान की मौत सिर्फ एक आतंकी का अंत नहीं, बल्कि शांति की उम्मीद है। कश्मीर के लोग, जो सेब के बागों में मेहनत करते हैं, पर्यटकों का स्वागत करते हैं, वो बस चैन चाहते हैं। मुझे याद है, एक बार श्रीनगर के डल झील पर एक शिकारा वाले ने कहा था, “साहब, हम तो बस इतना चाहते हैं कि बच्चे स्कूल जाएं, बम की आवाज सुनने की जगह किताबों की बात करें।” बागू खान जैसे लोग इस सपने के दुश्मन थे। लेकिन अब, हर मुठभेड़, हर ऑपरेशन के साथ, कश्मीर की वादियां शांति की ओर बढ़ रही हैं।
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