
एक नई शुरुआत, भरोसे के साथ
zoho mail indian: कभी आपने सोचा है कि भारत सरकार किस ईमेल से काम करती है? गूगल या माइक्रोसॉफ्ट? नहीं। अब जवाब है — Zoho Mail, जो पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर बना है। हाल ही में, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के Zoho Mail पर शिफ्ट होने के बाद अब केंद्रीय एजेंसियों के 12 लाख से ज्यादा कर्मचारी भी इस भारतीय प्लेटफॉर्म पर आ चुके हैं।
ये बदलाव सिर्फ एक टेक्नोलॉजी स्विच नहीं, बल्कि डेटा संप्रभुता और डिजिटल आत्मनिर्भरता की दिशा में एक साहसिक कदम है।
क्यों बदली सरकार ने ईमेल सेवा?
zoho mail indian: एम्स सर्वर हैक ने खोली आंखें
2022 में जब AIIMS के सर्वर हैक हुए और 1.3 टीबी से ज़्यादा डेटा लीक हो गया, तब केंद्र सरकार को समझ आया — विदेशी ईमेल सिस्टम पर भरोसा अब भारी पड़ सकता है। इसके बाद 3 साल तक लगातार जांच, ऑडिट और टेस्टिंग की गई।
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zoho mail indian: Zoho Mail ने जीता भरोसा
2023 में एक टेंडर के जरिए सरकार ने सुरक्षित ईमेल सेवा की तलाश शुरू की। Zoho Mail ने न केवल ये टेंडर जीता, बल्कि National Informatics Centre और CERT-In जैसी संस्थाओं की कड़ी सुरक्षा जांचों में भी पूरी तरह खरा उतरा।
Zoho: भारत की मिट्टी से निकली ग्लोबल टेक कंपनी
Zoho कोई नई स्टार्टअप नहीं, बल्कि 1996 में चेन्नई से शुरू हुई एक कंपनी है, जिसे श्रीधर वेम्बु ने अपने भाइयों और मित्र टोनी थॉमस के साथ मिलकर शुरू किया था। आज Zoho के 50 से ज़्यादा क्लाउड-आधारित प्रोडक्ट्स 180+ देशों में उपयोग किए जा रहे हैं।
- Zoho Mail में है एड-फ्री एक्सपीरियंस, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन
- कोई भी डेटा विज्ञापनदाताओं से साझा नहीं किया जाता
- यूजर इंटरफेस में ईमेल, नोट्स, कैलेंडर और कॉन्टैक्ट्स एक साथ
- NavIC और भारतीय सर्वर पर आधारित, जिससे डेटा देश में ही रहता है
Arattai: भारतीय WhatsApp का विकल्प भी तैयार
Zoho ने हाल ही में Arattai नामक चैट ऐप भी लॉन्च किया है, जो भारतीय संदर्भ में बना एक सुरक्षित और सरल मैसेजिंग विकल्प है। नाम तमिल शब्द है, जिसका अर्थ है “बातचीत”।
यह सिर्फ तकनीक नहीं, यह आत्मनिर्भरता की उड़ान है
सरकार का Zoho पर भरोसा जताना सिर्फ टेक्नोलॉजी की बात नहीं, यह उस विचार का समर्थन है कि भारत अपनी साइबर सुरक्षा को खुद संभाल सकता है। श्रीधर वेम्बु जैसे इनोवेटर ने साबित कर दिया कि बिना विदेशी निवेश के भी कोई भारतीय कंपनी वैश्विक स्तर पर छा सकती है।
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