तालिबान बना रहे हो बांग्लादेश? UN में यूनुस के खिलाफ बांग्लादेशियों का गुस्सा फूटा
yunus bangladesh un protest: न्यूयॉर्क के सड़कों पर शुक्रवार को कुछ ऐसा देखा गया, जो सिर्फ एक विरोध नहीं था — यह एक टूटे हुए भरोसे की चीख थी, एक उजड़े हुए वतन की पीड़ा, और एक समुदाय की आह, जिसे उनकी जड़ों से उखाड़ दिया गया।

UN मुख्यालय के बाहर बांग्लादेशी प्रवासियों ने मोहम्मद यूनुस के खिलाफ नारेबाज़ी की। ‘यूनुस पाकिस्तान जाओ’, ‘तालिबान स्टाइल राजनीति बंद करो’, ‘अल्पसंख्यकों को क्यों कुचला जा रहा है’ — जैसे नारों ने माहौल को झकझोर दिया।
यूनुस पाकिस्तान का आदमी है, वो बांग्लादेश नहीं समझता
yunus bangladesh un protest: प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि मोहम्मद यूनुस, जिन्हें पहले एक नोबेल विजेता और ग्रेमीन बैंक के संस्थापक के तौर पर जाना जाता था, अब इस्लामिक कट्टरपंथी ताकतों के साथ हाथ मिला चुके हैं। उन्होंने कहा:
“यूनुस बांग्लादेश को तालिबानी दिशा में ले जा रहे हैं। उन्होंने शेख हसीना को सत्ता से हटाकर अल्पसंख्यकों के लिए नरक खोल दिया है।”
एक प्रदर्शनकारी की आवाज़ भर्राई हुई थी जब उसने कहा
“हम हिंदू हैं, बांग्लादेश हमारे पूर्वजों की धरती है। लेकिन अब वहाँ सिर्फ डर है, हिंसा है, और घर जलते हैं। यूनुस ने हमारे लिए जगह नहीं छोड़ी।”
yunus bangladesh un protest: 133 मंदिर टूटे, 32 हिंदुओं की जान गई- ये विकास है?
बांग्लादेश हिंदू बुद्धिस्ट क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल की रिपोर्ट ने जो तस्वीर पेश की, वह रूह कंपा देने वाली थी:
- 4 महीने में 32 हिंदुओं की हत्या
- 133 मंदिरों पर हमले
- 13 बलात्कार और उत्पीड़न के मामले
यह आंकड़े नहीं, इंसानी त्रासदी हैं। सोचिए, किसी मां का बेटा सिर्फ इसलिए मारा गया क्योंकि वो एक ‘अल्पसंख्यक’ था? किसी बेटी के साथ हैवानियत इसलिए हुई क्योंकि उसने दुर्गा पूजा में हिस्सा लिया?
yunus bangladesh un protest: हसीना लोकतंत्र थी, यूनुस अंधेरा है
yunus bangladesh un protest: प्रदर्शनकारियों का मानना है कि 5 अगस्त 2024 को हुआ तख्तापलट एक साजिश थी, जिससे शेख हसीना को हटाकर एक कठपुतली सरकार लाई गई — जो विदेशी और धार्मिक कट्टरपंथी ताकतों के इशारों पर चल रही है।

एक बौद्ध प्रदर्शनकारी ने कहा हमारी पहचान, हमारा धर्म, हमारे त्यौहार — सब निशाने पर हैं। यूनुस सिर्फ एक नेता नहीं, एक विचारधारा बन गए हैं जो अल्पसंख्यकों की आवाज़ को दबा रही है।
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विकास के नाम पर भ्रम फैलाया जा रहा है
UNGA में यूनुस ने दावा किया कि बांग्लादेश अब विकास की राह पर है और प्रवासी मज़दूरों की मेहनत उसका प्रमाण है। पर प्रवासियों का सवाल है — “अगर विकास है, तो लोग क्यों भाग रहे हैं? मंदिरों पर हमले क्यों हो रहे हैं? चिन्मय कृष्ण दास जेल में क्यों हैं?यूनुस का भाषण सुनते हुए कई लोगों की आंखें नम थीं, लेकिन आंसू खुशी के नहीं थे — वे असहायता, अपमान और खोई हुई मातृभूमि की टीस थे।
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भारत पर भी टिप्पणी कर गए यूनुस
24 सितंबर को यूनुस ने भारत पर भी आरोप मढ़ा कि वो “फेक न्यूज़” फैला रहा है और बांग्लादेश को तालिबान से जोड़कर बदनाम कर रहा है। उनकी यह टिप्पणी आग में घी का काम कर गई।
हम भारत को दोष नहीं देते, क्योंकि हमारी ही जमीन पर आज हिंदुओं के मंदिर जलाए जा रहे हैं। दोष किसका है? न्यूयॉर्क के एक प्रदर्शनकारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
बांग्लादेश आज चौराहे पर खड़ा है। एक ओर वो देश है जिसने मुक्ति संग्राम में अपनी पहचान गढ़ी, दूसरी ओर वो वर्तमान है जिसमें अपने ही नागरिक डर के साए में जी रहे हैं।
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मोहम्मद यूनुस जैसे नेता जब ‘विकास’ का नाम लेकर ज़मीन पर ‘तालिबान’ जैसा माहौल बनाते हैं, तो सवाल उठाना ज़रूरी हो जाता है।
हमें फर्क नहीं पड़ता कि वो यूनुस है या कोई और… अगर वो हमारी बेटियों को डराता है, हमारे मंदिरों को तोड़ता है, हमारे धर्म को दबाता है — तो वो हमारा नेता नहीं हो सकता।
