चीन की सीक्रेट चिट्ठी ने बदल दिया भारत-चीन रिश्तों का मोड़!

नई दिल्ली/बीजिंग: पिछले कुछ महीनों में भारत और चीन के रिश्तों में अचानक बदलाव आया है। इसके पीछे एक महत्वपूर्ण और सीक्रेट चिट्ठी का हाथ है, जो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजी थी। इसमें जिनपिंग ने भारत-चीन संबंधों में सुधार की संभावनाओं पर चर्चा की और अमेरिका से जुड़ी व्यापारिक चिंताओं का जिक्र किया। इस चिट्ठी के बाद दोनों देशों के रिश्ते सुधार की दिशा में तेजी से बढ़े, और इसके कुछ ही महीनों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चीन दौरा तय हुआ।
अमेरिका के खिलाफ चीन का व्यापारिक युद्ध और भारत-चीन संपर्क
मार्च 2025 में, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के खिलाफ व्यापार युद्ध को और तेज किया था, तो चीन ने गुपचुप तरीके से भारत से संपर्क करना शुरू कर दिया। इस दौरान चीन ने भारत से चिंता जताई कि अगर भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों में गहरी साझेदारी हुई तो इससे चीन के व्यापारिक हितों को नुकसान हो सकता है। यह चिट्ठी राष्ट्रपति मुर्मू तक पहुंची और उनके माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी तक भी पहुँची।
इस चिट्ठी में चीन ने भारत से कहा कि द्विपक्षीय रिश्तों में सुधार की जरूरत है और इसके लिए चीन भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है। वहीं, चीन ने ये भी स्पष्ट किया कि वह भारत के साथ रिश्तों में किसी प्रकार का विरोध या तनाव नहीं चाहता, बल्कि सहयोग और मिलजुल कर काम करने के पक्ष में है।
भारत का गुस्सा: ट्रम्प के फैसले और टैरिफ विवाद
भारत और अमेरिका के रिश्तों में पहले ही तनाव था, खासकर तब जब ट्रम्प ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया था। इसके अलावा, ट्रम्प ने दावा किया था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराया था, जो भारत ने पूरी तरह से खारिज कर दिया। इससे भारत में गहरी नाराजगी फैल गई थी, खासकर तब जब अमेरिका द्वारा उठाए गए कदम भारत के राष्ट्रहित के खिलाफ थे।

इन फैसलों से पहले ही भारत और चीन के बीच गोपनीय बातचीत शुरू हो चुकी थी, लेकिन जून 2025 में, जब भारत ने चीन की चिट्ठी का गंभीरता से जवाब देना शुरू किया, तब दोनों देशों के रिश्तों में नवीन मोड़ आया।
मोदी का चीन दौरा: सात साल बाद रिश्तों में सुधार
अगस्त 2025 में दोनों देशों के नेताओं ने गलवान घाटी विवाद के बाद सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया। इसके कुछ महीनों बाद प्रधानमंत्री मोदी का चीन दौरा तय हुआ। मोदी का चीन दौरा विशेष रूप से इसलिए अहम है क्योंकि यह सात साल बाद हो रहा है और इस दौरान दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, व्यापारिक और कूटनीतिक रिश्तों को नए सिरे से स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
SCO समिट: मोदी-जिनपिंग-मोदी की बैठक
प्रधानमंत्री मोदी का चीन दौरा 2025 में आयोजित शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) समिट के लिए है। इस समिट में मोदी की मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति पुतिन से होगी। इस द्विपक्षीय बैठक में अंतर्राष्ट्रीय रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी, खासकर अमेरिका और भारत-चीन रिश्तों पर।

भारत-चीन संबंधों में नई उम्मीदें
इस चिट्ठी के माध्यम से जिनपिंग ने भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने के लिए अपनी इच्छाशक्ति को जाहिर किया है। वहीं, भारत ने भी इस पहल का स्वागत किया और दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
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