World Hypertension Day History: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) एक “साइलेंट किलर” है, जो बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। उच्च रक्तचाप दुनियाभर में मृत्यु और विकलांगता का प्रमुख कारण बनता जा रहा है। इसकी गंभीरता को समझते हुए हर साल 17 मई को विश्व उच्च रक्तचाप दिवस (World Hypertension Day) मनाया जाता है।
हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन को “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण अक्सर देर से सामने आते हैं, लेकिन इसका असर शरीर के हर महत्वपूर्ण अंग—हृदय, मस्तिष्क, किडनी और आंखों पर पड़ता है।
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आज हम आपको विस्तार से बताएंगे कि हाइपरटेंशन डे कब और क्यों शुरू हुआ, इसके मुख्य कारण, लक्षण, और इलाज क्या हैं, और कैसे इससे बचाव किया जा सकता है।
हाइपरटेंशन डे कब शुरू हुआ?
विश्व हाइपरटेंशन दिवस पहली बार 2005 में वर्ल्ड हाइपरटेंशन लीग (WHL) द्वारा मनाया गया था। इस दिन को शुरू करने का उद्देश्य था लोगों को यह समझाना कि उच्च रक्तचाप एक गंभीर, लेकिन कंट्रोल किया जा सकने वाला रोग है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनिया भर में लगभग 1.28 बिलियन वयस्क उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं और इनमें से लगभग 46% लोग अपनी स्थिति से अनजान होते हैं।
“भारत में भी स्थिति चिंताजनक है — हर तीसरा वयस्क हाइपरटेंशन से जूझ रहा है।”
हाइपरटेंशन क्या है?
हाइपरटेंशन तब होता है जब धमनियों में रक्त का दबाव सामान्य से अधिक हो जाता है। सामान्य रक्तचाप का स्तर लगभग 120/80 mmHg होता है। जब यह स्तर लगातार 140/90 mmHg या उससे अधिक रहता है, तो उसे उच्च रक्तचाप कहा जाता है।
हाइपरटेंशन के प्रकार…
प्राथमिक (Primary/Essential Hypertension)
इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं होता और यह धीरे-धीरे विकसित होता है। यह सबसे आम प्रकार है।
माध्यमिक (Secondary Hypertension)
यह किसी अन्य रोग या स्थिति जैसे किडनी रोग, हार्मोनल असंतुलन, या कुछ दवाओं के कारण होता है।
हाइपरटेंशन के कारण (Causes of Hypertension)
हाइपरटेंशन के पीछे कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं, जिनमें से कुछ जीवनशैली से जुड़े होते हैं और कुछ अनुवांशिक या जैविक कारणों से।
अनुचित जीवनशैली
1. अत्यधिक नमक का सेवन
2. अत्यधिक तले-भुने और फैटयुक्त भोजन
3. धूम्रपान और शराब
4. शारीरिक निष्क्रियता
मानसिक तनाव
लम्बे समय तक तनाव में रहने से हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे रक्तचाप बढ़ सकता है।
वजन अधिक होना (मोटापा)
मोटे लोगों में दिल को रक्त पंप करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे रक्तचाप बढ़ता है।
परिवार में इतिहास (जेनेटिक कारण)
अगर परिवार में किसी को हाई ब्लड प्रेशर है, तो आपको भी इसका खतरा बढ़ जाता है।
5. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, धमनियां सख्त हो जाती हैं और रक्तचाप बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।
6. किडनी की बीमारी, थायराइड समस्या, या हार्मोनल असंतुलन

हाइपरटेंशन के लक्षण..
अक्सर उच्च रक्तचाप के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, लेकिन कुछ मामलों में निम्नलिखित लक्षण दिख सकते हैं:
1. सिरदर्द (विशेष रूप से सुबह के समय), चक्कर आना।
2. धुंधला दिखना
3. दिल की धड़कन तेज होना
4. थकावट या भ्रम
5. सांस लेने में कठिनाई
6. नाक से खून आना
7. सीने में दर्द
इन लक्षणों को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है।
हाइपरटेंशन के दुष्प्रभाव (जटिलताएं)
1. हृदयाघात (Heart Attack)
2. स्ट्रोक (Stroke)
3. गुर्दे की विफलता (Kidney Failure)
4. नेत्र क्षति (Retinopathy)
5. धमनी फटने का खतरा (Aneurysm)
6. मेमोरी लॉस और डिमेंशिया
हाइपरटेंशन की जांच कैसे की जाती है?
1. डिजिटल या मैनुअल ब्लड प्रेशर मॉनिटर से जांच
2. बार-बार और अलग-अलग समय पर माप कर औसत निकाला जाता है
3. डॉक्टर 24 घंटे की “Ambulatory BP Monitoring” भी सुझाव दे सकते हैं
4. रक्त परीक्षण, मूत्र परीक्षण, ECG, ईकोकार्डियोग्राफी, किडनी फंक्शन टेस्ट भी करवाए जा सकते हैं
हाइपरटेंशन का इलाज (Treatment of Hypertension)
जीवनशैली में बदलाव…
1. नमक की मात्रा कम करें – दिन में 5 ग्राम से अधिक नमक न लें।
2. रोजाना व्यायाम करें – वॉक, योग, साइकलिंग आदि।
3. धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं
4. तनाव से बचें – ध्यान, प्राणायाम, हँसी और संगीत इसमें सहायक हैं।
5. नींद पूरी लें – 7-8 घंटे की नींद अनिवार्य है।
6. वजन नियंत्रित रखें – मोटापे को कंट्रोल करें।

दवाओं से इलाज..
1. डॉक्टर हाइपरटेंशन के लिए निम्नलिखित दवाएं दे सकते हैं:
2. डाययूरेटिक्स (Diuretics)
3. बीटा-ब्लॉकर्स (Beta-blockers)
4. ACE इनहिबिटर (ACE Inhibitors)
5. कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स
6. ARBs (Angiotensin II receptor blockers)
दवाओं का चयन व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार किया जाता है।
हाइपरटेंशन से बचाव के लिए सुझाव…
1. हफ्ते में कम से कम 5 दिन 30 मिनट की एक्सरसाइज़ करें
2. नियमित BP जांच कराते रहें, खासकर 35 की उम्र के बाद
3. फास्ट फूड और प्रोसेस्ड खाने से बचें
4. फाइबर और पोटैशियम युक्त खाद्य पदार्थ जैसे फल, सब्जियां और साबुत अनाज खाएं
5. कैफीन और मीठी चीजों का सेवन सीमित करें
6. परिवार में किसी को हाइपरटेंशन है तो विशेष सतर्कता बरतें
