Shani Dev: भारतीय धर्म और संस्कृति में शनिदेव को न्याय के देवता कहा गया है। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनिवार को विशेष पूजा की जाती है, व्रत रखे जाते हैं और खासकर उन्हें सरसों का तेल चढ़ाया जाता है। आज हम बताएंगे कि आखिर शनिदेव को तेल ही क्यों चढ़ाया जाता है? क्या इसके पीछे कोई धार्मिक कहानी है या ज्योतिषीय कारण? क्या इसका कोई वैज्ञानिक पहलू भी है?
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शनिदेव कौन हैं?
हिंदू धर्म में शनिदेव नवग्रहों में से एक हैं और उन्हें कर्म और न्याय का देवता माना जाता है। वे सूर्यदेव और छाया (संवर्णा) के पुत्र हैं। उनका वाहन कौआ (या काला कौआ), रंग काला, वस्त्र काले और स्वभाव गंभीर बताया गया है। शनि का प्रभाव व्यक्ति की राशि, कर्म और जीवनशैली पर बहुत गहराई से पड़ता है।

शनिदेव को तेल चढ़ाने की परंपरा कैसे शुरू हुई?
शनिदेव को तेल चढ़ाने की परंपरा बहुत पुरानी है और इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। उनमें से एक प्रमुख कथा इस प्रकार है –
कथा: राजा विक्रमादित्य और शनिदेव की परीक्षा…
एक बार राजा विक्रमादित्य ने दरबार में पूछा कि नवग्रहों में सबसे प्रभावशाली कौन है? दरबारियों ने शनिदेव को सबसे क्रूर ग्रह कहा। राजा ने इसका विरोध किया और कहा कि शनि की कोई शक्ति नहीं है। इस अपमान से क्रोधित होकर शनिदेव ने विक्रमादित्य को कष्ट देने का संकल्प लिया।
उन्होंने राजा को 7.5 वर्षों (साढ़ेसाती) तक कठोर परीक्षाओं से गुजरने पर मजबूर किया। विक्रमादित्य को कई वर्षों तक दर-दर भटकना पड़ा, उन्होंने तेल बेचने का काम तक किया। अंततः जब उनका कष्टकाल समाप्त हुआ, तो उन्होंने शनिदेव से क्षमा मांगी और काले तिल व तेल से उनकी पूजा की। तभी से यह मान्यता बनी कि शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से तेल चढ़ाने का महत्व…
ज्योतिष में शनि एक भारी और धीमी गति से चलने वाला ग्रह है, जिसे “क्रूर ग्रह” भी माना जाता है। यह व्यक्ति के कर्मों के आधार पर उसे फल देता है – अच्छे कर्म पर आशीर्वाद, बुरे पर दंड। तेल चढ़ाने के ज्योतिषीय कारण..
शनि के अशुभ प्रभाव को शांत करने के लिए..
सरसों के तेल को शनि के क्रोध को शांत करने वाला माध्यम माना जाता है।
कर्म शुद्धि का प्रतीक..
तेल काले रंग का होता है जो शनि की छाया का प्रतिनिधित्व करता है। इसे अर्पण कर हम अपनी बुरी छाया को हटाने की कामना करते हैं।
ऊर्जा का संतुलन..
तेल में ‘तामसिक’ ऊर्जा होती है जो शनि की ‘तामसिक प्रवृत्ति’ को शमन कर सकती है।
रोग और दुर्भाग्य से राहत..
शनि दोष से जुड़ी समस्याओं जैसे लंबे समय से चल रहे रोग, कोर्ट-कचहरी के मामले, या वित्तीय संकट को दूर करने में इसका महत्व है।
तेल चढ़ाने का सही तरीका..
शनिदेव को सरसों का तेल शनिवार को चढ़ाना सबसे शुभ माना जाता है। इसके लिए कुछ प्रमुख नियम –
1. शनिवार को सूर्योदय से पहले स्नान कर साफ वस्त्र पहनें।
2. शनि मंदिर जाएं या पीपल के पेड़ के नीचे पूजा करें।
3. शनिदेव की मूर्ति या चरणों में तेल अर्पित करें।
4. “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें।
5. काले तिल, काला वस्त्र, लोहे का दान करें।

क्या तेल चढ़ाना जरूरी है?
हालांकि तेल चढ़ाना परंपरा का हिस्सा है, लेकिन उसका मूल भाव है ‘कर्म सुधारना’ और आत्मशुद्धि। सिर्फ तेल चढ़ा देने से शनिदेव को प्रसन्न नहीं किया जा सकता, जब तक कि व्यक्ति अपने कर्म, सोच और व्यवहार में सुधार न करे।
