vijay shah colonel sofiya : देश की सबसे बड़ी अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कुंवर विजय शाह की उस विवादित टिप्पणी पर बड़ा फैसला सुनाया है जिसमें उन्होंने भारतीय सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को “आतंकी की बहन” बताया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस टिप्पणी को “राष्ट्रीय शर्म” करार दिया है और शाह की दी गई माफी को “मगरमच्छ के आंसू” बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने इस मामले की SIT (विशेष जांच टीम) से जांच कराने के आदेश भी दिए हैं।
vijay shah colonel sofiya : मामला क्या है?
11 मई को मध्य प्रदेश के महू इलाके में एक कार्यक्रम के दौरान विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा:
“मोदी जी ने हमारी बहनों का बदला लेने के लिए उसी समुदाय की बहन को भेजा… अगर हमारी बहनों को विधवा करोगे तो तुम्हारी बहनें तुम्हें नंगा कर देंगी।”
इशारा कर्नल सोफिया कुरैशी की ओर था, जो ऑपरेशन सिंदूर में नेतृत्वकारी भूमिका में थीं।
🧑⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
शाह की तरफ से जब वकील ने कोर्ट में माफी का तर्क रखा, तो जस्टिस बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने तीखी प्रतिक्रिया दी:
“एक मंत्री के मुंह से निकला हर शब्द जिम्मेदार होता है। यह माफी नहीं, खुद को बचाने की कोशिश है।”
इसके साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि तीन सदस्यीय SIT गठित की जाएगी, जिसमें एक महिला अधिकारी भी शामिल होंगी और वह मध्य प्रदेश के बाहर की होंगी।
🚨 हाईकोर्ट और FIR की पृष्ठभूमि
इस विवादित बयान के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इंदौर के महू थाने में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। विजय शाह ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया।
🧑✈️ कौन हैं कर्नल सोफिया कुरैशी?
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भारतीय सेना की सिग्नल कोर की वरिष्ठ अधिकारी
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संयुक्त राष्ट्र के कांगो मिशन में भारतीय दल की पहली महिला कमांडर
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ऑपरेशन सिंदूर की मीडिया ब्रीफिंग में प्रमुख भूमिका
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सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के एक आदेश में उनके साहस की सराहना की थी
📢 समर्थन और विरोध
बयान के बाद देशभर में महिला अधिकार संगठनों, पूर्व सैन्य अधिकारियों, और राजनीतिक दलों ने शाह की टिप्पणी की आलोचना की। सोशल मीडिया पर #JusticeForColSofiya ट्रेंड कर रहा है।
⚖️ क्या होगी अगली कार्रवाई?
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार SIT जल्द ही अपनी जांच शुरू करेगी।
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26 मई को बिहार के मुज़फ्फरपुर की अदालत में भी इस मामले में सुनवाई तय है, जहां सामाजिक कार्यकर्ता ने मंत्री के खिलाफ याचिका दायर की है।
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मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज हो चुकी है, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
🔚 शब्दों की मर्यादा नहीं, तो पद की गरिमा भी नहीं!
इस मामले ने साफ कर दिया है कि अब भारत की न्यायपालिका राजनीतिक नेताओं के बयानों की गंभीरता को नज़रअंदाज़ नहीं करेगी। सुप्रीम कोर्ट का यह सख्त रुख न सिर्फ महिलाओं के सम्मान की रक्षा करता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि देश की सेना और उसकी अधिकारी किसी भी राजनीति के लिए मोहरा नहीं बन सकतीं।
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