
चमोली में भूस्खलन
चमोली जिले के डेवल तहसील के मोपाटा गांव में भूस्खलन ने एक घर और पशुशाला को मलबे में दफना दिया। इस हादसे में तारा सिंह (62) और उनकी पत्नी कमला देवी (60) की मौत हो गई। एक अन्य दंपति को चोटें आईं, जबकि 15-20 पशु लापता हैं। जिले में बादल फटने से आलकनंदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया, जिससे आवासीय क्षेत्र जलमग्न हो गए। बद्रीनाथ हाईवे कई जगहों पर अवरुद्ध हो गया, जिसमें चमोली-नंदप्रयाग, कामेड़ा, भानरपानी, पागलनाला, जिलासू, गुलाबकोटी और चटवापिपल शामिल हैं। थराली क्षेत्र में भी मलबा गिरने से कई घर क्षतिग्रस्त हुए। मलारी नेशनल हाईवे पर भूस्खलन से दर्जनों गांव अलग-थलग पड़ गए। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं, लेकिन सड़कों के बंद होने से राहत कार्य बाधित हो रहा है।
Uttarakhand Natural Disaster: रुद्रप्रयाग में आठ लापता
रुद्रप्रयाग जिले के बासुकेदार क्षेत्र में तीन बादल फटने की घटनाओं ने आधा दर्जन से अधिक गांवों को तबाह कर दिया। चेनागढ़ क्षेत्र में चार स्थानीय और चार नेपाली नागरिक मलबे में दबे बताए जा रहे हैं, जिनमें से आठ लापता हैं। जाखोली में एक महिला की घर गिरने से मौत हो गई। तलजमान गांव में 30-40 परिवार मलबे और बाढ़ के पानी में फंसे हैं। मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जो 2013 की बाढ़ की याद दिला रहा है। बद्रीनाथ हाईवे सिरोबगढ़ पर बंद है, जबकि केदारनाथ मार्ग बांसवाड़ा-चोप्टा के बीच चार जगहों पर अवरुद्ध हो गया।
स्युर गांव में एक घर क्षतिग्रस्त हुआ और एक कार बह गई। बडेथ, बगद्धर और तलजमान गांवों में नालों से पानी और मलबा घुस गया। अरखुंड में मछली तालाब और पोल्ट्री फार्म बह गए। चेनागढ़ बाजार में मलबा भर गया, कई वाहन बह गए। एसपी अक्षय प्रह्लाद कोन्डे ने बताया कि सड़कें सात-आठ जगह टूट गई हैं, जिससे बचाव टीमें पहुंचने में कठिनाई हो रही है। अब तक 200 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है।

टिहरी गढ़वाल में मंदिर तबाह
टिहरी गढ़वाल के बूढ़ा केदार क्षेत्र में भूस्खलन से पशुशालाएं और मंदिर मलबे में दफन हो गए। गेनवाली गांव में एक घर का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि सिंचाई विभाग की दीवार बह गई। आलू के खेत मलबे से ढक गए, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ। जिले में सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित है। लवारा गांव में केदारघाटी का मोटरवे पुल बह गया, जबकि हनुमान मंदिर जलमग्न हो गया। दो लोग लापता हैं। प्रशासन ने तत्काल बचाव कार्य शुरू किया है।
बागेश्वर के कपकोट में घरों को नुकसान
बागेश्वर जिले के कपकोट ब्लॉक के पौसारी ग्राम पंचायत में रात भर की तेज बारिश से आधा दर्जन घर क्षतिग्रस्त हो गए। बसंती देवी और बच्चूली देवी की मौत हो गई, जबकि रमेश चंद्र जोशी, गिरीश और पुरण जोशी लापता हैं। बसंती देवी के बेटे पवन को घायल अवस्था में बचाया गया। सिमोती गांव में भी बादल फटने से दो की मौत हुई। जिले में भारी तबाही मची है।
मुख्यमंत्री धामी की समीक्षा बैठक
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उच्च अधिकारियों, सभी जिलाधिकारियों और पुलिस विभाग के साथ आपदा राहत कार्यों की समीक्षा बैठक की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रभावित जिलों के डीएम से बातचीत की और तत्काल बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि प्रदेश सरकार हर कदम पर प्रभावितों के साथ खड़ी है। आपदा प्रभावितों को तत्काल 5-5 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है।

राहत और पुनर्वास के लिए सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों को समय पर राशन, भोजन और दैनिक उपयोग की वस्तुएं उपलब्ध कराई जाएं। नदियों के जल स्तर की निरंतर निगरानी की जाए। बंद पड़ी सड़कों को शीघ्रता से खोला जाए। स्यानाचट्टी के पास यमुना नदी पर आए मलबे को मशीनों से हटाने और सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित करने के आदेश दिए। बरसात का मौसम समाप्त होते ही सभी सड़कों की मरम्मत और सुधार कार्य में तेजी लाई जाए। 15 सितंबर के बाद चारधाम यात्रा में अपेक्षित तेजी को देखते हुए सभी व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद किया जाए। अधिकारियों को मौसम की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए निरंतर अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए।
बचाव कार्यों में सेना और NDRF
Uttarakhand Natural Disaster: एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना और स्थानीय पुलिस की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय हैं। चमोली और रुद्रप्रयाग में हेलीकॉप्टर से बचाव कार्य चल रहे हैं। अब तक सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानांतरित किया गया है। स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि अगले कुछ दिनों में बारिश जारी रह सकती है। राज्य सरकार ने केंद्र से अतिरिक्त सहायता मांगी है।
