Matangeshwar Mahadev Temple: भारत में वैसे तो कई शिव मंदिर है, जो अपने आप में एक कथा बयान करते है। लेकिन खजुराहों में भगवान भोलेनाथ का एक ऐसा मंदिर है, जहां जीवित शिवलिंग विराजमान है। कहा जाता है यह एकमात्र चंदेलकालीन के समय का मंदिर है, जो रहस्यो से भरा हुआ है। कहते हैं यह मंदिर मणि के ऊपर विराजमान है। यह मंदिर मतंगेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध है।
Matangeshwar Mahadev Temple: जीवित रुप में विराजमान है शिवलिंग
कहा जाता है कि, खजुराहों का यह मंदिर मणि के ऊपर बनाया गया है। कहा जाता है कि हजारों साल पहले द्वापर युग के समय भगवान भोलेनाथ ने कुंती पुत्र युधिष्टिर को एक चमत्कारिक मणि दी थी, लेकिन उन्होंने वह मणि ऋषि मतंग क दिया और उन्होंने बाद में उस मणि को राजा हर्षवर्धन को सौंप दिया।
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राजा ने उस मणि को जमीन के गाड़ दिया। कुछ दिन बाद अपने आप उस जगह पर शिवलिंग प्रकट हो गए। और धीरे- धीरे वह शिवलिंग बढ़ने लगी फिर उस स्थान पर मंदिर बनावाया गया। बताया जाता है, ये शिवलिंग की प्रतिमा हर साल बढ़ती है। कहा जाता है यह प्रतिमा मणि की शक्ति की वजह से बढ़ती है।
Matangeshwar Mahadev Temple: इस मंदिर के नाम के पीछे का रहस्य
स्थानीय निवासी बताते है कि, इस मंदिर के नीचे मौजूद मणि राजा को मतंग ऋषि ने दी थी इसी वजह से मंदिर का नाम ऋषि के नाम पर ‘मतंगेश्वर महादेव मंदिर’ रखा गया।
शिवलिंग का भव्य स्वरुप
यहां विराजमान शिवलिंग बहुत अद्भुत है, कहते है हर साल इस शिवलिंग का आकार हर साल बढ़ता है, और इसका साक्ष्य भी मौजूद है। यह शिवलिंग नीचे पताल लोक और ऊपर स्वर्गलोक दोनों तरफ इसका आकार बढ़ रहा हैं। कहते हैं जब शिवलिंग नीचे की ओर पाताल लोक तक और ऊपर स्वर्ग की ओर स्वर्ग तक पहुंच जाएगा तो ये दुनिया खत्म हो जाएगी।
अभी इस शिवलिंग की ऊंचाई लगभग 2.5 मीटर और व्यास 1.1 मीटर है।
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खजुराहों का सबसे ऊंचा मंदिर
मध्यप्रदेश के खजुराहो में स्थित भगवान भोलेनाथ का मतंगेश्वर मंदिर खजुरहो का सबसे ऊंचा मंदिर कहा जाता है। पुरात्व सर्वेक्षण के मुताबिक इस मंदिर की स्थापना 900 से 925 ईस्वी के बीच हुई। राजा चंद्र देव भगवान भोलेनाथ के अन्नय भक्त थे। उन्होंने ही इस मंदिर का निर्माण कराया था।
इस मंदिर में किसी तरह की नक्काशी नहीं की गई और कहते हैं यहां विराजमान शिवलिंग को ऋषि मतंग के रुप में पूजा जाता है। कई लोग यह भी कहते हैं कि यह वो स्थान है जहां माता पार्वती और भोलेनाथ का विवाह हुआ था।
महाशिवरात्रि के दिन भक्तों की उमड़ती है भीड़
इस मंदिर में महाशवरात्रि के समय भक्तों की भीड़ उमड़ती है। लोग दूर – दूर से भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने आते हैं।
