Truth Behind Plucking Tulsi: भारतीय संस्कृति में तुलसी को मात्र एक पौधा नहीं, बल्कि “देवी तुलसी” के रूप में पूजा जाता है। यह लगभग हर हिंदू घर के आंगन या मंदिर में पाया जाता है। आयुर्वेद से लेकर पुराणों तक, तुलसी को जीवन का आधार माना गया है। इसे विष्णुप्रिया भी कहा जाता है, क्योंकि यह भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।
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तुलसी को लेकर कई नियम और परंपराएं जुड़ी हैं, जिनमें से एक प्रमुख है – कुछ विशेष दिनों पर तुलसी न तोड़ना।
कौन-से दिन तुलसी तोड़ना वर्जित माना गया है?
भारतीय परंपरा के अनुसार, निम्नलिखित दिनों में तुलसी पत्र तोड़ना अशुभ माना जाता है:
1. रविवार (Sunday)
2. पूर्णिमा (पूर्ण चंद्र की रात)
3. एकादशी (हर पखवाड़े की 11वीं तिथि)
4. संध्या काल (शाम के समय)
5. श्राद्ध पक्ष या पितृ पक्ष के दिन
इन दिनों तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते क्योंकि यह धार्मिक दृष्टि से पवित्रता भंग करने के समान माना जाता है।

तुलसी न तोड़ने के पीछे की पौराणिक कथा…
देवी तुलसी और भगवान विष्णु की कथा –
पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी तुलसी का जन्म एक धार्मिक स्त्री वृंदा के रूप में हुआ था, जो राक्षस राजा जलंधर की पत्नी थीं। वृंदा अत्यंत पतिव्रता थीं, और उनके तप के प्रभाव से जलंधर अमर हो गया था।
भगवान विष्णु ने जलंधर का वध करने के लिए वृंदा का पतिव्रता धर्म भंग किया। जब वृंदा को इस छल का पता चला, तो उन्होंने भगवान विष्णु को पत्थर बन जाने का श्राप दिया। उस श्राप के प्रभाव से भगवान विष्णु “शालिग्राम” रूप में परिवर्तित हो गए।
वृंदा ने अपने प्राण त्याग दिए। बाद में उनके शरीर से तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ। इस कारण तुलसी को वृंदा देवी का स्वरूप माना गया।
इसी वजह से तुलसी को कुछ विशिष्ट तिथियों पर तोड़ने से मना किया जाता है।
एकादशी और तुलसी…
एकादशी, जो हर माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की 11वीं तिथि को आती है, भगवान विष्णु की पूजा के लिए बेहद खास मानी जाती है। हालांकि तुलसी को विष्णु प्रिय माना गया है, फिर भी एकादशी के दिन तुलसी नहीं तोड़ी जाती।
इसका कारण है – एकादशी के दिन तुलसी माता आराम करती हैं और इस दिन उन्हें छेड़ना अशुभ माना गया है। इस दिन यदि पूजा में तुलसी का उपयोग आवश्यक हो तो एक दिन पहले ही तुलसी पत्र तोड़कर सुरक्षित रखे जाते हैं।
रविवार और तुलसी..
रविवार को सूर्य देव का दिन माना जाता है। पुराणों के अनुसार, इस दिन तुलसी माता उपवास पर होती हैं। इसलिए उन्हें तोड़ना या छूना वर्जित माना गया है।

पूर्णिमा और संध्या के समय तुलसी तोड़ने की मनाही…
1. पूर्णिमा को देवी शक्ति और चंद्रमा की विशेष पूजा होती है। तुलसी तोड़ना पवित्रता के उल्लंघन जैसा माना जाता है।
2. संध्या के समय यानी सूर्यास्त के बाद तुलसी को नहीं तोड़ना चाहिए क्योंकि यह समय देवताओं के विश्राम का समय माना गया है।
वैज्ञानिक कारण…
1. रात और संध्या में पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया बंद होती है। इस समय तुलसी के पत्तों में नमी और ताजगी कम होती है, जिससे उनमें मौजूद औषधीय गुण घट सकते हैं।
2. लसी के पत्तों में यूजेनॉल (Eugenol) नामक तेल होता है जो दिन के समय अधिक सक्रिय रहता है। रात को यह कम हो जाता है।
3. बार-बार और अनियंत्रित तरीके से तुलसी तोड़ना पौधे के विकास को नुकसान पहुंचा सकता है।
धार्मिक उपयोग में तुलसी का महत्व…
तुलसी का उपयोग पूजा-पाठ में अत्यंत शुभ माना गया है।
1. भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी पत्र आवश्यक होते हैं।
2. शालिग्राम की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है।
3. तुलसी विवाह (कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी को) एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है, जिसमें तुलसी को भगवान विष्णु के साथ विवाह के रूप में पूजा जाता है।
4. तुलसी पत्र को गंगाजल, चंदन, अक्षत आदि के साथ पूजा में उपयोग किया जाता है।
तुलसी और जीवन में सकारात्मकता…
1. घर में तुलसी को लगाने से वातावरण शुद्ध होता है।
2. तुलसी का रस प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है।
3. यह कीटाणु नाशक होती है और आसपास के रोगाणुओं को समाप्त करती है।
4. तुलसी के पौधे के पास बैठकर ध्यान करना मानसिक शांति प्रदान करता है।
