जब दुश्मनी की दूरी केवल दो मील बची हो…

अलास्का… एक ऐसा ठंडा, अजब‑अजीब इलाका जहाँ रूस सिर्फ दो मील दूर है, लेकिन राजनीतिक दूरी अब भी अक्षिंज बनी हुई है।
अब वहीं की बर्फ और सेना की आंखों के बीच ‘Joint Base Elmendorf‑Richardson’ एक नई सुबह का इंतज़ार है।
वो शाम, जब ट्रम्प और पुतिन पहली बार face‑to‑face बैठेंगे, नाटों से नहीं, बल्कि सीधे संवाद से। सिर्फ एक ट्रांसलेटर और फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस इतनी सादगी और सनसनी का मिला-जुला एहसास हो, जैसे कोई पुरानी फिल्मों का क्लाइमेक्स हो।
इतिहास : निक्सन और हिरोहितो की 1971 की मुलाकात
54 साल पहले, उस ही बेस ने एक और ऐतिहासिक पल देखा: जब जम्हूरियत‑अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन पहली बार जापान के महाराज हिरोहितो से विदेश में मिले थे। उस समय, जापानी राजा का विदेश में कदम रखना एक चेहरे का फ्लैश था और याद दिलाता है, ये जगह सिर्फ सर्टिफिकेट वाली नहीं, बल्कि ‘इतिहास बनाने वाली’ भी है।
क्यों यही बेस क्यों अलास्का?
Cold War की परछाई अभी भी यहाँ रहीं जाती है। Elmendorf‑Richardson बेस को कभी “North America की ‘Top Cover’” कहा जाता था यानी सोवियत हमले से बचाने वाली आखिरी शरण। आज भी F‑22 Raptor जैसी उच्च‑शक्ति वाली जेट्स वहीं खड़ी हैं।
सुरक्षा और सादगी का मेल। यह जगह सार्वजनिक नजरों से दूर, लेकिन सैन्य रूप से पूरी तरह सुरक्षित है। यहाँ कोई विरोध नहीं, सिर्फ सत्ता की चुप्पी में वार्ता।
ICC वारंट से बचाव। पुतिन पर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत का गिरफ्तारी वारंट है। लेकिन अमेरिका ICC का सदस्य नहीं इसलिए वह ऐसा देश चुन सकता है जहां उसे गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
दूरी का मतलब सीधे संवाद। यह यूक्रेन और यूरोपीय नेताओं से अलगाव नहीं, बल्कि सीधे कपटी लेकिन स्पष्ट संवाद की ओर बढ़ने की मंशा जताता है।

सुरक्षा का पूरा किलेबन्द इंतज़ाम
बेस में 32,000 सैनिक तैनात हैं यानी पूरी Anchorage की जनसंख्या का तकरीबन 10% आस-पास 88 किमी दूर रूसी जेट्स को तैनात किया गया सुरक्षा की जो लाइन हो, वह दूसरी तरफ भी खड़ी रहे पूरे इलाके में 300 किमी तक नो‑फ्लाई जोन, एयर‑गैप्ड नेटवर्क, कई परतों की सुरक्षा (नेशनल गार्ड, स्पेशल फोर्सेज, सीक्रेट सर्विस) ये बैठक किसी फिल्म का सेट नहीं, बल्कि तलवार के दो धार वाले मंच की तरह तैयार हो रहा है।
वार्ता का पहलू: शांति पहले
यह बैठक सीधे युद्धविराम की पहल नहीं, बल्कि एक “Listening Exercise” यानी सुनने का प्रयास है। ट्रम्प की मंशा यह जानने की है कि पुतिन क्या चाहता है और असली शांति की राह क्या हो सकती है। यूरोपीय और यूक्रेनी लीडरों का आशंका जताना क्या ये बातचीत रूस को फाइदा पहुंचाएगी?
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