जहरीले कफ सीरप कांड: कभी अस्पताल की दहलीज पर उम्मीद लेकर पहुंचे परिवार, आज अदालतों के चक्कर काट रहे हैं. मासूम बच्चों की मौत का दर्द अब सिर्फ निजी नहीं रहा, यह एक बड़े सवाल में बदल चुका है. जिम्मेदार कौन है? इसी सवाल के बीच मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जहरीले कफ सीरप मामले में सख्त रुख बरकरार रखा है. छिंदवाड़ा जिले में जहरीला कफ सीरप पीने से बच्चों की मौत के मामले में आरोपी डॉक्टर प्रवीण सोनी को हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली है. छह अक्टूबर 2025 से जेल में बंद डॉ. सोनी की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने फिलहाल जमानत देने से इनकार कर दिया है.
जहरीले कफ सीरप कांड:जिला कोर्ट के बाद हाईकोर्ट से भी झटका
जिला न्यायालय से जमानत खारिज होने के बाद डॉक्टर प्रवीण सोनी ने उच्च न्यायालय का रुख किया था. गुरुवार 15 जनवरी को न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ में मामले की सुनवाई हुई, लेकिन यहां भी आरोपी को निराशा हाथ लगी। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 20 जनवरी की तारीख तय की है।
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जहरीले कफ सीरप कांड: दवा कंपनियों पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश
सुनवाई के दौरान डॉ. सोनी ने खुद को निर्दोष बताते हुए दवा निर्माण कंपनियों पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश की. उनका तर्क था कि कफ सीरप की गुणवत्ता और उसमें मौजूद तत्वों की जवाबदेही कंपनियों की है, न कि चिकित्सक की। हालांकि अदालत में यह दलील ज्यादा असर नहीं छोड़ सकी।
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परिजनों और वकीलों ने जताया विरोध
इस मामले में जमानत का विरोध भी जोरदार तरीके से दर्ज कराया गया। जहरीले कफ सीरप से जान गंवाने वाले बच्चों के परिजन और 13 अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट में आपत्तियां पेश कीं. उनका कहना था कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा बेहद संवेदनशील अपराध है.
फैसले से जुड़ी बड़ी तस्वीर
कानूनी जानकारों के मुताबिक, यह मामला भविष्य में दवा वितरण और चिकित्सकीय जिम्मेदारी को लेकर एक मिसाल बन सकता है। जिस तरह से अदालत ने जनस्वास्थ्य के पहलू को केंद्र में रखा है, उससे साफ है कि इस केस को हल्के में लेने के मूड में न्यायपालिका नहीं है।
