Today Chhindwara News: छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव विकासखंड सिविल अस्पताल से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है. यहां लेबर पेन के बाद जुन्नारदेव की एक महिला को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां महिला ने सातवें महीने में ही 4 बच्चों को एक साथ जन्म दिया.लेकिन दुर्भाग्यवश चारों नवजातों की मौत हो गई।प्रीमेच्योर डिलीवरी और केस की गंभीरता को देखते हुए महिला को जिला अस्पताल रेफर किया गया चारों बच्चों का वजन काफी कम था दोनों बच्चों के फेफड़े और अन्य अंग पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए थे। जिससे सांस लेने में तकलीफ हो रही थीजिला अस्पताल लाते वक्त रास्ते में दो बच्चों ने दम तोड़ दिया. वहीं, दो बच्चे एसएनसीयू मे अंतिम सांस ली थी वही प्रसूता की जान बच गई। उसकी हालत स्थिर है
Today Chhindwara News: क्या कम वजन बना मौत की वजह
एसएनसीयू के नोडल अधिकारी डॉ. अंशुल लाम्बा ने बताया कि अस्पताल में भर्ती कराए गए दो नवजातों में एक बालिका का वजन 600 ग्राम और एक बालक का वजन महज 350 ग्राम था। अत्यधिक कम वजन होने के कारण दोनों बच्चों के फेफड़े और अन्य अंग पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए थे। सांस लेने में परेशानी के चलते पहले बालिका ने देर रात दम तोड़ा, जबकि बालक ने मंगलवार तड़के करीब 3:30 से 4 बजे के बीच अंतिम सांस ली।
Today Chhindwara News: चार भ्रूण को विकास नहीं हो सका
डॉक्टरों के अनुसार जुन्नारदेव क्षेत्र में कुपोषण एक बड़ी चुनौती है और यहां अकसर कम वजन के बच्चों के जन्म के मामले सामने आते हैं। हालांकि सामान्य तौर पर नवजातों का वजन 2 किलो या उससे अधिक रहता है। इस मामले में महिला के गर्भ में एक साथ चार बच्चे होने के कारण किसी भी भ्रूण का समुचित विकास नहीं हो पाया, जिससे फेफड़े और अन्य जरूरी अंग सही आकार नहीं ले सके।
मेडिकल टीम जुटी रही
वही नवजातों को बचाने के लिए सिविल सर्जन डॉ. सुशील दुबे, चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. पवन नादुरकर, आरएमओ डॉ. हर्षवर्धन कुढ़ापे सहित डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की पूरी टीम लगातार प्रयासरत रही, लेकिन बच्चों का वजन जीवित रहने के लिए जरूरी न्यूनतम मानक से काफी कम होने के कारण मेडिकल साइंस की कोशिशें नाकाम रहीं।
सातवें महीने में डिलीवरी करानी पड़ी
जुन्नारदेव के ग्राम रोराढ़ेकनी माल निवासी गुन्नो (पति जगर सिंह) को प्रसव पीड़ा होने पर सोमवार को जुन्नारदेव अस्पताल लाया गया था। गर्भावस्था के सातवें महीने में महिला की हालत गंभीर होने के चलते डॉक्टरों ने तत्काल डिलीवरी कराने का निर्णय लिया। बीएमओ डॉ. सुरेश नागवंशी और डॉ. रोमा मूलचंदानी की टीम ने सुरक्षित नॉर्मल डिलीवरी कराई। बच्चों की नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें 108 एंबुलेंस से छिंदवाड़ा रेफर किया गया, लेकिन जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही दो नवजातों की मौत हो गई।
