छत्तीसगढ़ की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक तस्वीर आज सबका ध्यान खींच ले गई. कभी जंगलों में हथियार थामने वाले, आज लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच देखने पहुंचे. प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही देखने आए 120 सरेंडर नक्सलियों में कई ऐसे नाम भी शामिल थे, जो कभी सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती माने जाते थे.
झीरम हमले का मास्टरमाइंड चैतू भी शामिल
नक्सलियों में झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड चैतू उर्फ श्याम दादा भी शामिल था. चैतू पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था और उसने महज तीन महीने पहले जगदलपुर में आत्मसमर्पण किया था.इसी समूह में रुपेश दादा भी नजर आए, जो नक्सल संगठन की सेंट्रल कमेटी का सदस्य रह चुका है। रुपेश पर एक करोड़ रुपये का इनाम था और उसने 210 साथियों के साथ सरेंडर किया था। कभी जिनके नाम से इलाके कांपते थे, आज वही लोग विधानसभा की कार्यवाही शांति से देखते दिखे.
झीरम हमले से सदन तक का सफर
साल 2013 का झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े नक्सली हमलों में गिना जाता है। उसी हमले की साजिश रचने वाला चैतू आज लोकतांत्रिक व्यवस्था को करीब से देख रहा था। पुलिस और प्रशासन के लिए यह दृश्य प्रतीकात्मक भी था, और संदेश देने वाला भी कि मुख्यधारा में लौटने का रास्ता खुला है.
गुरुवार को डिप्टी सीएम के निवास पर था डिनर
इससे एक दिन पहले गुरुवार रात ये सभी सरेंडर नक्सली प्रदेश के डिप्टी सीएम विजय शर्मा के निवास पर डिनर में शामिल हुए थे। बताया गया कि उनके स्वागत के लिए रेड कार्पेट बिछाई गई, फूलों से अभिनंदन हुआ। यह पहल सरकार की पुनर्वास नीति को दिखाने की कोशिश मानी जा रही है.
