balaghat news : sugar breath analyzer machine : फूंक मारकर शुगर लेवल की जांच करने वाली मशीन – शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0
balaghat news : sugar breath analyzer machine : बालाघाट, शुगर के मरीजों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। अब आपको बार-बार खून निकालने या सुई चुभाने की आवश्यकता नहीं होगी। बालाघाट के शासकीय जटाशंकर त्रिवेदी कॉलेज के प्रोफेसर और छात्रों ने एक नई तकनीक विकसित की है, जिसमें फूंक मारते ही आपका शुगर लेवल पता चल जाएगा। इस नई मशीन का नाम शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 है, जो बिना खून निकाले सिर्फ एसिटोन की सांस से शुगर लेवल का माप लेती है।
🏆 शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 ने हासिल किया पहला स्थान
शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 ने भोपाल में आयोजित सृजन कार्यक्रम में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इस कार्यक्रम में 150 प्रोजेक्ट्स को चयनित किया गया था, जिनमें बालाघाट के इस प्रोजेक्ट ने अपनी जगह बनाई। अब, यह प्रोजेक्ट राज्य भर में चर्चा का विषय बन गया है और हर किसी को उम्मीद है कि यह तकनीक देशभर में शुगर जांच की प्रक्रिया को बदल देगी।
💡 क्या है शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0?
यह एक ब्रेथ एनलाइजर डिवाइस है जो आपके सांस में उपस्थित एसिटोन की मात्रा को मापकर आपके शरीर के शुगर लेवल का अनुमान लगाता है। शुगर लेवल का पता लगाने के लिए इस मशीन को फूंक मारनी होती है, और कुछ सेकंड्स में ही यह डिवाइस यह बताती है कि आपका शुगर लेवल लो, मॉडरेट, या हाई है।
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लो: शुगर लेवल कम है।
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मॉडरेट: शुगर लेवल सामान्य है।
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हाई: शुगर लेवल ज्यादा है, जिससे डायबिटीज होने की संभावना हो सकती है।
यह तकनीक विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जिन्हें लगातार शुगर की जांच के लिए सुई के इस्तेमाल से गुजरना पड़ता है।

🧑🔬 कैसे काम करती है यह मशीन?
इस मशीन का आविष्कार प्रोफेसर डॉ. दुर्गेश अगासे और उनके छात्रों द्वारा किया गया है। इस मशीन के पीछे जो वैज्ञानिक आधार है, वह एसिटोन और ग्लूकोज के बीच के संबंध पर आधारित है। जैसे ही शुगर के मरीज की कीटोजेनिक मेटाबॉलिज्म शुरू होती है, शरीर में एसिटोन का निर्माण होता है, जो सांस के माध्यम से बाहर आता है। इसके आधार पर यह मशीन शुगर लेवल का अनुमान लगाती है।
🔬 शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 के महत्वपूर्ण पहलू
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बेहद सटीक और तेज़: इस डिवाइस का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह सेकंडों में शुगर लेवल का अनुमान लगा देती है, और इसके लिए किसी भी प्रकार की रक्त जांच की आवश्यकता नहीं होती।
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आधुनिक तकनीक: मशीन में इंजीनियरिंग और कोडिंग का उपयोग किया गया है ताकि एसिटोन और ग्लूकोज के अनुपात का सही ढंग से अध्ययन किया जा सके।
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प्रोफेसर अगासे का योगदान: इस प्रोजेक्ट पर 8 साल से काम कर रहे प्रोफेसर डॉ. दुर्गेश अगासे की कड़ी मेहनत और शोध के बाद ही यह मशीन बन पाई है। इस परियोजना का पेटेंट 2023 में हुआ।
💬 डॉक्टरों की प्रतिक्रिया
डॉ. वेदप्रकाश लिल्हारे, जो एक जनरल फिजिशियन हैं, ने इस प्रोजेक्ट की सराहना करते हुए कहा, “यह एक उत्कृष्ट नवाचार है। अब मरीजों को बार-बार खून निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।” हालांकि, डॉ. लिल्हारे ने यह भी बताया कि सभी शुगर मरीजों में एसिटोन नहीं बनता, इसलिए कुछ मरीजों को इस डिवाइस से सटीक परिणाम नहीं मिल सकते।
💪 भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक और कदम आगे
शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ा नवाचार है, बल्कि यह भारतीय इंजीनियरिंग और विज्ञान के स्वदेशी समाधानों की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। यह प्रोजेक्ट भारत के लिए गर्व का विषय है, और इसके द्वारा भारत ने यह साबित कर दिया है कि स्वदेशी तकनीक न केवल उपयोगी है, बल्कि वह वैश्विक स्तर पर भी प्रभाव डाल सकती है।
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