शिक्षक का सड़क हादसा

ई-अटेंडेंस की जल्दबाजी में शिक्षक का एक्सीडेंट, प्राचार्य को लिखा पत्र- 'स्कूल आते समय हुआ हादसा, एबसेंट न लगाएं'

मध्य प्रदेश में ई-अटेंडेंस लागू होने के बीच एक शिक्षक सड़क हादसे में घायल हो गया, जिससे इस प्रणाली की व्यावहारिक समस्याओं पर नई बहस छिड़ गई है।

ई-अटेंडेंस की जल्दबाजी में शिक्षक का एक्सीडेंट, प्राचार्य को लिखा पत्र- 'स्कूल आते समय हुआ हादसा, एबसेंट न लगाएं'

मध्य प्रदेश में स्कूलों में लागू की जा रही ई-अटेंडेंस व्यवस्था के बीच एक शिक्षक के सड़क हादसे का मामला सामने आया है। समय पर विद्यालय पहुंचकर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने की जल्दबाजी में शिक्षक की बाइक फिसल गई, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद शिक्षक ने प्राचार्य को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि उन्हें अनुपस्थित दर्ज न किया जाए, क्योंकि दुर्घटना स्कूल आते समय हुई थी। इस घटना के बाद शिक्षक संगठनों ने ई-अटेंडेंस व्यवस्था की व्यवहारिक चुनौतियों को लेकर सरकार से जवाब मांगा है।

वे गंभीर रूप से घायल हो गए

घायल शिक्षक पूरनचंद्र सोनी मुरैना जिले के सबलगढ़ विकासखंड के बामसौली निवासी हैं। उन्होंने अपने पत्र में बताया कि 2 जुलाई को लगातार बारिश के बावजूद वे समय पर विद्यालय पहुंचने और ई-अटेंडेंस लगाने के लिए जल्दी निकल पड़े थे। रास्ते में रामपुर घाटी क्षेत्र में सड़क अत्यधिक फिसलन भरी होने के कारण उनकी बाइक अनियंत्रित होकर फिसल गई और वे गंभीर रूप से घायल हो गए।

उस दिन अनुपस्थित न माना जाए

हादसे के बाद राहगीरों और विद्यालय के कर्मचारियों की मदद से उन्हें सबलगढ़ अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकीय जांच में उनके शरीर पर कई जगह चोटें आने के साथ आंख में ब्लड क्लॉट होने की पुष्टि हुई। शिक्षक ने प्राचार्य से अनुरोध किया है कि दुर्घटना को ध्यान में रखते हुए उन्हें उस दिन अनुपस्थित न माना जाए।

प्रशासनिक बोझ नहीं डाला जाना चाहिए

इस घटना के बाद शिक्षक संगठनों ने ई-अटेंडेंस प्रणाली को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि तकनीक का उपयोग स्वागतयोग्य है, लेकिन पहले उससे जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं का समाधान भी होना चाहिए। उनका कहना है कि शिक्षकों पर अतिरिक्त आर्थिक और प्रशासनिक बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।

जमीनी चुनौतियों पर एक नई बहस छेड़ दी

शिक्षक संगठनों ने शिक्षा विभाग से यह भी पूछा है कि ई-अटेंडेंस लागू करने का वास्तविक उद्देश्य क्या है और इससे अब तक क्या लाभ मिला है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि जिन क्षेत्रों में इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है या जिन शिक्षकों के पास स्मार्टफोन नहीं है, वहां उपस्थिति कैसे दर्ज होगी। इस घटना ने ई-अटेंडेंस व्यवस्था के क्रियान्वयन और जमीनी चुनौतियों पर एक नई बहस छेड़ दी है।

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