पंजाब सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। बुधवार को जारी आदेश के बाद राज्य कर्मचारियों का DA 42 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया है। यह बढ़ोतरी 1 सितंबर 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। वित्त विभाग के मुताबिक, इस फैसले को राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है।
यह घटनाक्रम पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा राज्य के चीफ सेक्रेटरी को व्यक्तिगत रूप से तलब किए जाने के एक दिन बाद सामने आया है। चीफ सेक्रेटरी को 5 अक्टूबर को अदालत में पेश होना है।
वित्त विभाग ने जारी किया आदेश
वित्त विभाग ने DA बढ़ोतरी से संबंधित आदेश सभी विशेष मुख्य सचिवों, अतिरिक्त मुख्य सचिवों, वित्तीय आयुक्तों, प्रधान सचिवों और प्रशासनिक सचिवों के अलावा विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों, जिला एवं सत्र न्यायाधीशों और अन्य संबंधित अधिकारियों को भेज दिया है।
सरकार के इस फैसले के बाद कर्मचारियों के लंबे समय से चले आ रहे DA और एरियर विवाद में एक अहम बदलाव आया है। हालांकि, कर्मचारियों की मुख्य मांग लंबित DA और एरियर के पूर्ण भुगतान को लेकर बनी हुई है।
अप्रैल से शुरू हुआ था विवाद
इस मामले की शुरुआत अप्रैल 2026 में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश से हुई थी। अदालत ने पंजाब सरकार को 30 जून तक कर्मचारियों का लंबित DA और एरियर चुकाने का निर्देश दिया था। सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में LPA दायर की।
इसके बाद 3 अगस्त को डिवीजन बेंच ने सरकार की अपीलें खारिज कर दीं और 15 दिनों के भीतर कर्मचारियों को केंद्रीय पैटर्न तथा राज्य के IAS अधिकारियों की तर्ज पर लंबित DA देने का आदेश दिया। आदेश का पालन न होने पर 6 प्रतिशत सालाना ब्याज लगाने की बात भी कही गई थी।
17 अगस्त को समयसीमा समाप्त होने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद मिनिस्टीरियल स्टाफ ने दो दिन की हड़ताल की। 27 अगस्त से कर्मचारियों ने पेन-डाउन और सामूहिक अवकाश के जरिए राज्यव्यापी महा-हड़ताल शुरू कर दी। सरकार ने 8 सितंबर को 'नो वर्क, नो पे' का आदेश जारी किया।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला
1 सितंबर को पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में SLP के जरिए चुनौती दी। सरकार ने करीब ₹14,191 करोड़ के बकाये का हवाला देते हुए कहा कि इतनी बड़ी राशि का तत्काल भुगतान वित्तीय रूप से संभव नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में नौ तकनीकी आपत्तियां दर्ज कीं।
11 सितंबर को हाईकोर्ट ने सरकार को तकनीकी खामियां दूर कर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू कराने के लिए 10 दिन का समय दिया। 18 सितंबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान और कर्मचारी संगठनों के बीच बैठक हुई। इसके बाद सरकार ने आंदोलन समाप्त कराने के लिए DA में 8 प्रतिशत बढ़ोतरी की घोषणा की।
5 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई
22 सितंबर को हाईकोर्ट ने मामले में देरी को लेकर सरकार पर सख्त रुख अपनाया और चीफ सेक्रेटरी को 5 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया। इसके अगले ही दिन वित्त विभाग ने 8 प्रतिशत DA बढ़ोतरी का नोटिफिकेशन जारी कर दिया।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि छठे पंजाब पे-कमिशन की सिफारिशों के मुताबिक DA केंद्रीय पैटर्न पर मिलना चाहिए। वहीं सरकार का तर्क है कि भारी कर्ज और अन्य वित्तीय देनदारियों के कारण लगभग ₹14,200 करोड़ का बकाया एकमुश्त जारी करना मुश्किल है।
अब मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में होगी।