मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री स्वर्गीय पंडित रविशंकर शुक्ल की जयंती के अवसर पर रविवार को मध्यप्रदेश विधानसभा के सेंट्रल हॉल में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। सुबह 10 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्रिमंडल के सदस्यों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों ने पंडित रविशंकर शुक्ल के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा

देश के विभाजन के समय तत्कालीन भोपाल रियासत ने पाकिस्तान में शामिल होने की इच्छा जताई थी। ऐसे संवेदनशील दौर में पंडित रविशंकर शुक्ल ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए भोपाल को मध्यप्रदेश की राजधानी बनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस फैसले ने देश विरोधी और अलगाववादी मंसूबों को पूरी तरह विफल कर दिया तथा प्रदेश की एकता और अखंडता को मजबूती प्रदान की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित रविशंकर शुक्ल केवल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री ही नहीं थे, बल्कि आधुनिक मध्यप्रदेश की मजबूत नींव रखने वाले दूरदर्शी नेता भी थे। उन्होंने शिक्षा, सिंचाई, उद्योग और प्रशासनिक दक्षता के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए, जिनका लाभ प्रदेश को आज भी मिल रहा है। उनके विकासवादी दृष्टिकोण और प्रशासनिक क्षमता को हमेशा याद रखा जाएगा।
प्रदेश को उद्यानिकी के क्षेत्र में प्रथम पुरस्कार

डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की वर्तमान विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश तेज गति से विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश को उद्यानिकी के क्षेत्र में देश का प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है, निवेश लगातार बढ़ रहा है और सरकार ने 14 लाख किसानों से रिकॉर्ड गेहूं खरीदी कर कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार की ओर से पंडित रविशंकर शुक्ल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके आदर्श, राष्ट्रभक्ति और जनसेवा की भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से उनके बताए मार्ग पर चलकर मध्यप्रदेश के विकास और राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी निभाने का आह्वान किया।