Chhattisgarh Water Conservation: जल संरक्षण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ (JSJB 3.0) अभियान के तीसरे चरण में राज्य ने शानदार प्रदर्शन करते हुए यह उपलब्धि हासिल की। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ के 5 जिले देश के टॉप-10 जिलों में शामिल हुए हैं।
रायपुर। बारिश के पानी को सहेजने और भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ में किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। नई दिल्ली में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य के जल संरक्षण मॉडल और जनभागीदारी से किए जा रहे कार्यों की जानकारी साझा की।
जल संरक्षण को बनाया जनअभियान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें किसान, ग्राम पंचायत, जल सखी, जल मित्र और स्थानीय समुदायों को जोड़ा गया है।उन्होंने कहा कि बारिश की हर बूंद को रोकना और उसे जमीन के भीतर पहुंचाना आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ गांव और खेत के स्तर पर जल संरचनाएं तैयार की जा रही हैं।
JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ सबसे आगे
जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है।आंकड़ों के मुताबिक, JSJB 3.0 में प्रदेश में 79,775 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें से 77,719 संरचनाओं का काम पूरा हो चुका है।इससे पहले अभियान के पहले और दूसरे चरण में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर रहा था। JSJB 1.0 में राज्य में 4,05,561 जल संरचनाएं बनाई गई थीं। वहीं दूसरे चरण में 24,07,456 जल संरचनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से 23,07,768 का काम पूरा हुआ।
छत्तीसगढ़ के 5 जिले टॉप-10 में
राज्य के साथ-साथ जिलों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया है। जल संरक्षण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के टॉप-10 जिलों में शामिल हुए हैं।इन जिलों में बारिश के पानी को रोकने, भू-जल रिचार्ज करने और स्थानीय जल स्रोतों को बचाने के लिए पंचायत और ग्रामीणों की भागीदारी से काम किया गया।
कोरिया का 5 प्रतिशत मॉडल चर्चा में
मुख्यमंत्री साय ने कोरिया जिले के ‘5 प्रतिशत मॉडल’ का भी उल्लेख किया। इस मॉडल में किसान अपनी कृषि भूमि का करीब 5 प्रतिशत हिस्सा वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध करा रहे हैं।इस जमीन पर ऐसी संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिनसे बारिश का पानी खेत से बाहर बहने के बजाय वहीं रुक सके और धीरे-धीरे जमीन में समा सके।इस मॉडल की खासियत यह है कि किसान केवल योजना के लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि जल संरक्षण में खुद भागीदार बन रहे हैं।
पानी की कमी वाले ब्लॉक 26 से घटकर 19
राज्य सरकार के अनुसार, जल संरक्षण के प्रयासों का असर भू-जल की स्थिति पर भी दिखाई दे रहा है। छत्तीसगढ़ में पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है।इसके अलावा पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के भी सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान जताया गया है। इसके लिए जल संचयन संरचनाओं के निर्माण के साथ पुराने जल स्रोतों का संरक्षण, भू-जल रिचार्ज और जल संरचनाओं की मैपिंग की जा रही है।
तकनीक और जनभागीदारी पर जोर
जल संरक्षण के काम की निगरानी के लिए जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग और मॉनिटरिंग की जा रही है। गांवों में जल सखी, जल मित्र, किसान और पंचायत प्रतिनिधि अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं।सरकार का लक्ष्य है कि बारिश का ज्यादा से ज्यादा पानी गांव और खेतों की सीमा में रोका जाए, ताकि भू-जल स्तर में सुधार के साथ सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता भी बेहतर हो।
मुख्यमंत्री ने दिए कई सुझाव
नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में मुख्यमंत्री साय ने सुझाव दिया कि देश के हर राज्य को अपनी भौगोलिक परिस्थितियों और बारिश के पैटर्न के अनुसार अलग ‘कैच द रेन प्लान’ तैयार करना चाहिए।उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘स्टेट वाटर अवार्ड्स’ शुरू करने का भी सुझाव दिया। साथ ही जल संरचनाओं की मैपिंग, नियमित मॉनिटरिंग और हर तीन महीने में अभियान की समीक्षा पर जोर दिया।
2027 तक 2 करोड़ नई जल संरचनाओं का लक्ष्य
देश में 31 मई 2027 तक दो करोड़ नई जल संरचनाएं बनाने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में छत्तीसगढ़ का जनभागीदारी आधारित मॉडल दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।बारिश के पानी को स्थानीय स्तर पर रोकने और जमीन में पहुंचाने से भू-जल रिचार्ज बढ़ाने के साथ खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपने जल संरक्षण के अनुभव और सफल मॉडलों को देश के दूसरे राज्यों के साथ साझा करने के लिए तैयार है।