भोपाल में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास स्थित गैस प्रभावित इलाकों में दूषित पेयजल आपूर्ति को लेकर विवाद गहरा गया है। गैस पीड़ितों के चार संगठनों ने नगर निगम पर सीवेज मिला पानी सप्लाई करने का आरोप लगाया है। संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो भोपाल में भी इंदौर के भागीरथपुरा जैसी स्थिति बन सकती है। शनिवार को संगठनों ने सीवेज लाइन और पेयजल पाइपलाइन के पास के वीडियो भी सार्वजनिक किए।
जांच रिपोर्ट में मिले फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया
गैस पीड़ित संगठनों ने प्रभावित क्षेत्रों के पानी की जांच कराई, जिसकी रिपोर्ट में करीब 70 प्रतिशत नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिलने का दावा किया गया है। तारा एक्वाचेक H2S वायल टेस्ट के जरिए किए गए परीक्षण में यह संकेत मिला कि कई इलाकों में लोगों तक मल से दूषित पानी पहुंच रहा है। संगठनों ने इसे गंभीर जनस्वास्थ्य का मामला बताया है।
नगर निगम ने दावों को बताया गलत
नगर निगम ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि 42 गैस प्रभावित बस्तियों में केवल उपचारित और शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। निगम का कहना है कि पानी की गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग की जाती है और रंग, गंध, पीएच, क्लोरीन, टर्बिडिटी तथा बैक्टीरिया सहित विभिन्न मानकों पर जांच होती है। निगम के अनुसार अब तक की रिपोर्ट में किसी भी क्षेत्र में पानी दूषित नहीं पाया गया है।
वीडियो जारी कर संगठनों ने उठाए सवाल
नगर निगम के दावों के बाद भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने कुछ वीडियो जारी किए। वीडियो में सीवेज लाइन के बीच से गुजरती पेयजल पाइपलाइन दिखाई गई है। उनका कहना है कि उड़िया बस्ती सहित कई इलाकों में ऐसी स्थिति होने से सीवेज का पानी सप्लाई लाइन में मिलने की आशंका बनी रहती है। संगठनों ने दोषियों पर कार्रवाई और सीवर परियोजनाओं को जल्द पूरा करने की मांग की है।
19 इलाकों में दूषित पानी मिलने का दावा
भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के अनुसार जुलाई में 30 बस्तियों से 63 पानी के नमूने लिए गए थे, जिनमें से 43 नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म की पुष्टि हुई। अन्नू नगर, जेपी नगर, चंदन नगर, शिव नगर, सुंदर नगर और उड़िया बस्ती सहित 19 क्षेत्रों में पानी दूषित मिलने का दावा किया गया है। संगठनों का कहना है कि दूषित पानी के कारण दस्त, उल्टी, टाइफाइड जैसी जलजनित बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।