Sati Maharani Mandir Amethi: अमेठी का सती महारानी मंदिर आस्था और विश्वास का ऐसा केंद्र है जहां दूर-दूर से सुहागिन महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की मंगल कामना लेकर पहुंचती हैं यहां यह मान्यता पीढ़ियों से चली आ रही है कि सती महारानी अपने भक्तों के सुहाग की रक्षा करती हैं । मन्नत पूरी होने पर महिलाएं परंपरा के अनुसार दुरदुरिया भोज कराती हैं । गुरुवार को मंदिर परिसर में इसी परंपरा की झलक देखने को मिली जब हजारों की संख्या में सुहागिन महिलाएं भोज में शामिल हुईं . पूरा वातावरण श्रद्धा और उल्लास से भरा रहा ।
Sati Maharani Mandir Amethi: इतिहास से निकली आस्था की कहानी
स्थानीय इतिहास में दर्ज एक घटना इस मंदिर की मान्यता की जड़ मानी जाती है । साल 1842 में अमेठी रजवाड़े के राजा विशेश्वर बख्श सिंह का असमय निधन हो गया था । राजा के निधन के बाद उनकी रानी ने अपने पति का शव गोद में लेकर सती होने का संकल्प लिया । कहा जाता है कि सती होने से पहले रानी ने कहा था
अमेठी रजवाड़े में अब कोई रानी विधवा नहीं होगी ।
तभी से यह विश्वास बना कि सती महारानी का आशीर्वाद अमेठी और यहां की महिलाओं पर हमेशा बना रहेगा ।
डॉ. संजय सिंह से जुड़ा विश्वास
आज भी लोग इस आस्था को जीवित उदाहरणों से जोड़कर देखते हैं अमेठी के वर्तमान राजा डॉ. संजय सिंह का नाम श्रद्धालुओं के बीच अक्सर लिया जाता है साल 1989 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन पर कई गोलियां चली थीं । गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उनकी जान बच गई . इलाज लंदन तक चला लेकिन वे पूरी तरह स्वस्थ होकर लौटे । इसके बाद वे चार बार सांसद बने । स्थानीय लोगों का मानना है कि यह सब सती महारानी की कृपा से संभव हुआ ।
दुरदुरिया भोज में उमड़ी आस्था
गुरुवार को घाऊघार गांव के पूर्व प्रधान नरेंद्र तिवारी के पुत्र पिंटू तिवारी की मन्नत पूरी होने पर दुरदुरिया भोज का आयोजन किया गया । भोज में हजारों सुहागिन महिलाएं पहुंचीं । नरेंद्र तिवारी ने बताया कि उन्होंने सती महारानी से एक मनोकामना मांगी थी जो पूरी हो गई । उसी के बाद यह भोज कराया गया । भोज के बाद महिलाओं के लिए टिक्की और गोलगप्पों की अलग से व्यवस्था की गई थी जिससे महिलाओं में खासा उत्साह दिखा
