परमाणु ड्रोन से लैस पनडुब्बी बना सकती है समुद्र को जंग का मैदान
russia khabarovsk nuclear: रूस ने एक बार फिर दुनिया को अपनी सैन्य ताकत का संदेश दे दिया है। शनिवार को रूस ने अपनी नई परमाणु पनडुब्बी ‘खाबरोवस्क’ (Khabarovsk) को आधिकारिक तौर पर पानी में उतारा। यह वही पनडुब्बी है जिसके बारे में सालों से अफवाहें चल रही थीं और अब जब इसे देखा गया, तो दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों में हलचल मच गई।
इस पनडुब्बी की सबसे खतरनाक खासियत है यह ‘पोसेइडॉन’ (Poseidon) न्यूक्लियर ड्रोन से लैस है। यह ड्रोन किसी भी परमाणु मिसाइल से अलग है। इसे कई जानकार “डूम्सडे वेपन” यानी कयामत का हथियार कह रहे हैं क्योंकि यह समुद्र के नीचे से चलकर दुश्मन देश के तटों तक पहुँच सकता है और विशाल लहरों के साथ रेडिएशन फैलाकर भारी तबाही मचा सकता है।
russia khabarovsk nuclear: रूस ने 12 दिन में दिखाए 3 नए घातक हथियार
खाबरोवस्क के लॉन्च के साथ ही रूस ने बीते 12 दिनों में तीसरा बड़ा हथियार पेश किया है। 21 अक्टूबर को रूस ने ‘बुरेवस्तनिक’ (Burevestnik) नामक परमाणु ऊर्जा से चलने वाली क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया था, जिसकी रेंज को “अनलिमिटेड” बताया गया था। इसके कुछ दिन बाद ‘पोसेइडॉन’ टॉरपीडो का सफल परीक्षण किया गया और अब, खाबरोवस्क पनडुब्बी ने इस परमाणु तिकड़ी को पूरा कर दिया है। रूसी रक्षा मंत्री ने इसे देश की “समुद्री सुरक्षा और सामरिक शक्ति में ऐतिहासिक मील का पत्थर” बताया। उनके मुताबिक, यह सिर्फ एक लॉन्च नहीं, बल्कि रूस की समुद्री रणनीति में नया युग है जिसमें दुश्मन को दूरी से ही डराने की क्षमता है।
russia khabarovsk nuclear: 10 साल पुराना ‘सीक्रेट प्रोजेक्ट’ अब आया सामने
खाबरोवस्क का नाम पहली बार 2015 में सामने आया था, जब सैटेलाइट इमेज में इसकी झलक मिली थी। तब से यह सीवमाश शिपयार्ड में गुप्त रूप से तैयार हो रही थी। इसे रूस की सबसे बड़ी डिज़ाइन एजेंसी ‘रुबिन डिजाइन ब्यूरो’ ने तैयार किया है। कहा जाता है कि इस प्रोजेक्ट पर पिछले 10 साल से गुप्त रूप से काम चल रहा था। अब जब इसे आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया है, तो ये साफ है कि रूस समुद्र के नीचे से होने वाली परमाणु जंग की तैयारी पूरी कर चुका है।
पोसेइडॉन ड्रोन: पानी के नीचे की ‘परमाणु तबाही’
पोसेइडॉन एक अनमैन्ड न्यूक्लियर ड्रोन टॉरपीडो है। यह 100 नॉट्स (लगभग 185 किमी/घंटा) की रफ्तार से चल सकता है और हजारों किलोमीटर की दूरी तक जा सकता है। इसका मकसद दुश्मन के तटीय इलाकों को परमाणु विस्फोट से तबाह करना है।
कहा जाता है कि अगर इसे किसी बड़े शहर के पास विस्फोटित किया जाए, तो यह रेडियोएक्टिव सुनामी जैसी लहरें पैदा कर सकता है। यह हथियार सीधे-सीधे किसी भी एंटी-मिसाइल सिस्टम को बेअसर कर देता है, क्योंकि यह समुद्र की गहराइयों में चलने वाला हथियार है जिसे पकड़ना लगभग नामुमकिन है।
दुनिया में बढ़ी चिंता, लेकिन रूस का आत्मविश्वास ऊंचा
खाबरोवस्क के लॉन्च के बाद पश्चिमी देशों में चिंता बढ़ गई है। कई रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह हथियार “संतुलन बिगाड़ने वाला” है, क्योंकि यह न्यूक्लियर डिटेरेंस के पुराने सिद्धांतों को चुनौती देता है। लेकिन रूस का कहना है यह उसकी रक्षा नीति का हिस्सा है, आक्रामक रणनीति का नहीं।
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