नीतीश कुमार और RCP दिखे एक साथ
दरअसल, मौका पटेल समाज द्वारा आयोजित मकर संक्रांति भोज रखा गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और RCP सिंह दोनों को आमंत्रित किया गया था। दोनों नेता एक ही समाज से आते हैं और लंबे समय तक साथ रहे हैं, इसलिए सबकी निगाहें इस मुलाकात पर टिकी रही।
CM नीतीश को बताया अभिभावक
RCP Singh JDU Return: दोनों के पहुंचने की टाइमिंग में थोड़ा फर्क था। मंच पर भी दोनों एक साथ नजर नहीं आए। लेकिन कार्यक्रम से निकलने के बाद RCP सिंह ने जो बयान दिया वो चर्चा में है। कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में RCP सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना अभिभावक बताया। उन्होंने कहा कि उनका रिश्ता किसी एक मौके या पद से जुड़ा हुआ नहीं है।

खरमास के बाद हो सकता है बदलाव
JDU में वापसी को वापसी को लेकर उन्होंने कहा कि, यह आपको जल्द ही पता चल जाएगा। बता दे कि, RCP सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न दिए जाने की मांग का भी समर्थन किया। खरमास खत्म होते ही बिहार की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
RCP Singh JDU Return: कौन है RCP सिंह?
बता दे कि, 63 वर्षीय सिंह आरसीपी मूल रूप से नालंदा के रहने वाले हैं, यहीं से CM नीतीश कुमार भी हैं। दोनों कुर्मी समाज से आते हैं। राजनीति में आने से पहले RCP सिंह उत्तर प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी भी रह चुके हैं। बताया जाता है कि 1996 में जब नीतीश कुमार केंद्र में अटल सरकार में मंत्री थे तो उसी दौरान उनकी नजर RCP सिंह पर पड़ी।

क्यों दिया इस्तीफा?
2005 में जब बिहार विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार CM बने, तो उन्होंने आरसीपी सिंह को दिल्ली से बिहार बुलाया। 2005 से 2010 के बीच RCP सिंह नीतीश कुमार के प्रधान सचिव रहे। इस दौरान पार्टी में RCP सिंह की पकड़ मजबूत होने लगी। वे राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे, लेकिन BJP से नजदीकी और JDU को तोड़ने का आरोप लगने पर उन्होंने 7 अगस्त को इस्तीफा दे दिया था।
