विष्णु देव साय कैबिनेट बैठक: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध धातुकला शिल्पकार हीराबाई झरेका बघेल को उनकी उत्कृष्ट कलात्मक उपलब्धियों के लिए राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार प्रदान किया. यह सम्मान छत्तीसगढ़ की समृद्ध धातुकला परंपरा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित स्थान दिलाने में उनके योगदान का प्रतीक है. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने की, जबकि राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं.
विष्णु देव साय कैबिनेट बैठक: हीराबाई झरेका बघेल कौन हैं ?
हीराबाई झरेका बघेल सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के वनांचल ग्राम पंचायत बैगीनडीह की निवासी हैं. वे ढोकरा कला की प्रसिद्ध शिल्पकार हैं और उन्होंने यह कला अपने पिता भुलाऊ झरेका और पति मिनकेतन बघेल से सीखी है. वर्ष 2011-12 में छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें सम्मानित किया था, जबकि उनके पति को 2006-07 में राज्य सरकार द्वारा सम्मान मिला था.
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क्या है ढोकरा कला?
ढोकरा कला छत्तीसगढ़ की सदियों पुरानी धरोहर है. यह पारंपरिक धातुकला तकनीक है, जिसमें मोम ढलाई विधि से कलाकृतियां बनाई जाती हैं. हीराबाई झरेका उन कलाकारों में शामिल हैं जिन्होंने इस परंपरा को आधुनिक समय के अनुरूप जीवंत बनाए रखने का कार्य किया है.
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छत्तीसगढ़ की पहचान को नई ऊंचाई: सीएम साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि “सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की ढोकरा–बेलमेटल शिल्पकार हीराबाई झरेका बघेल को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया जाना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है.
