जब बारिश सिर्फ बूंदों की नहीं, कहर की कहानी बन जाए…
बारिश, जो कभी राहत देती थी अब डराने लगी है। राजस्थान से हिमाचल, यूपी से गुजरात तक – ये कोई सामान्य मानसून नहीं है, ये प्रकृति की वो चेतावनी है जिसे हमने सालों नजरअंदाज किया।

राजस्थान में 108 साल का रिकॉर्ड टूटते-टूटते बचा। 1917 में हुई 844.2 मिमी बारिश के करीब पहुंचकर इस बार मानसून 693.1 मिमी बरस चुका है – और वो भी तब, जब विदाई अभी बाकी है। 63% बांध लबालब हैं, लेकिन लोग पूछ रहे हैं: “किस कीमत पर?
कुल्लू में घर नहीं बचे, परिवार उजड़ गए
सोमवार रात कुल्लू के एक गांव में जब ज़मीन फटी, तो एक पूरा घर मलबे में समा गया। एक ही परिवार के 8 लोग दबे, जिनमें से 4 की मौत हो गई। एक मां की चीखें अब भी घाटियों में गूंज रही होंगी “मेरे बच्चे…
प्राकृतिक आपदा नहीं कह सकते इसे अब। ये तो इंसानों की लापरवाही का जवाब है।
अहमदाबाद में करंट से कपल की मौत
गुजरात के अहमदाबाद में बारिश के पानी में छिपे करंट ने बाइक से गुजर रहे एक पति-पत्नी की जान ले ली। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो सिर्फ एक हादसा नहीं दिखाता, वो बताता है कि हमारे शहरों की व्यवस्था कितनी खोखली हो चुकी है।
यूपी में गंगा का रौद्र रूप, 50% वृंदावन जलमग्न
यूपी में गंगा, यमुना, सरयू जैसी नदियां उफान पर हैं। वृंदावन का आधा हिस्सा डूब चुका है। बांके बिहारी मंदिर से यमुना अब महज़ 100 मीटर दूर है। बलिया में नाव ही अब गांवों की लाइफलाइन बन चुकी है।
प्रयागराज में कच्चा मकान गिरने से पति-पत्नी की जान चली गई। वाराणसी, आगरा, कन्नौज हर जगह जल ही जल है, और उसके साथ तबाही।
ये मौसम नहीं, चेतावनी है…
जलवायु परिवर्तन अब किताबों की बात नहीं रही, वो हमारे घरों, सड़कों और दिलों में उतर चुका है। हर राज्य की तस्वीर एक जैसे दर्द से रंगी है टूटती दीवारें, बहते मकान, और रोते हुए लोग।

ये वक्त है समझने का कि विकास का मतलब सिर्फ एक्सप्रेसवे नहीं, स्थिरता भी होनी चाहिए।
बारिश से डर लगना, अब नई सामान्य स्थिति बन चुकी है।
हम सबका फर्ज़ है…
सरकारें राहत दे रही हैं, लेकिन असली राहत तो तब आएगी जब हम प्रकृति से टकराना बंद करेंगे और उसे समझना शुरू करेंगे।

आप जहां भी हों, सतर्क रहें। बारिश सिर्फ बादल नहीं लाती कई बार वो इंसान की सबसे बड़ी परीक्षा बनकर आती है।
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