Praggnanandhaa Beats Magnus Carlsen: भारत के युवा ग्रैंडमास्टर आर. प्रगनानंदा एक बार फिर अपने शानदार प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए वर्ल्ड नंबर – 1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को करारी शिकस्त दी। यह मुकाबला लास वेगास में चल रहे फ्रीस्टाइल चेस ग्रैंड स्लैम टूर के ग्रुप स्टेज के चौथे राउंड में खेला गया, जिसमें 19 वर्षीय प्रगनानंदा ने सिर्फ 39 चालों में कार्लसन को हरा दिया।
तीनों फॉर्मेट में कार्लसन को दी मात…
इस जीत के साथ प्रगनानंदा अब क्लाससिकल, रैपिड और ब्लिट्ज – तीनों ही फॉर्मेट में मैग्नस कार्लसन को हरा चुके हैं, यह किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए बेहद खास उपलब्धि मानी जाएगी।
Rameshbabu Praggnanandhaa got a landmark victory over world No.1 Magnus Carlsen at the Freestyle Chess Grand Slam event,Las Vegas.
Poor Magnus’s now like a bell meant to be rung by either Gukesh or by Praggnanandhaa.
Such wins #boostselfconfidence#FreestyleChess#smartworks pic.twitter.com/eGUeTHFkPV— R.T.Agyeya (@Vigour4bjp) July 17, 2025
टूर्नामेंट में संयुक्त टॉप पोजीशन पर पहुंचे प्रगनानंदा..
इस जीत के बाद आर. प्रगनानंदा के 4.5 पॉइंट्स हो गए हैं, और वे टूर्नामेंट में संयुक्त रुप से पहले स्थान पर पहुंच गए हैं। इस टूर्नामेंट में हर खिलाड़ी को 10 मिनट का बेस टाइम और हर चाल पर 10 सेकेंड की अत्याधिक समय सीमा दी जाती है।

टूर्नामेंट में अब तक 4 खिलाड़ियों से किया सामना..
पहले राउंड में आर. प्रगनानंदा ने उज्बेकिस्तान के नोदिरबेक अब्दुसत्तोरोव के खिलाफ ड्रॉ मैच खेला वहीं दूसरे में असाउबायेवा के खिलाफ जीत दर्ज की। लेकिन तीसरे राउंड में प्रगनानंदा ने कीमर को हराया और अब चौथे राउंड में 5 बार के वर्ल्ड चैंपियन रह चुके कार्लसन को हरा कर सबको चौंका दिया।
प्रगनानंदा के पर्सनल लाइफ की बात करें तो…
इनका जन्म चेन्नई में 10 अगस्त 2005 में हुआ, प्रगनानंद की बहन वैशाली भी चेस खेलती हैं। जो कि इंटरनेशनल चेस प्लेयर रह चुकी हैं। वहीं उनके पिता स्टेट कॉर्पोरेशन बैंक में काम करते हैं। और उनकी मां नागलक्ष्मी एक हाउसवाइफ हैं।
7 साल की उम्र में रचा इतिहास…
आर. प्रगनानंदा जब 7 साल के थे तब उन्होंने वर्ल्ड यूथ चेस चैंपियनशिप जीता था और सुर्खियों में आ गए थे। इस शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें FIDE मास्टर की उपाधि प्रदान की गई, जो कि शतरंज की पहली औपचारिक अंतरराष्ट्रीय उपाधियों में से एक है।
इसके बाद, साल 2016 में, सिर्फ 10 साल की उम्र में, प्रगनानंदा ने इतिहास रचते हुए दुनिया के सबसे युवा इंटरनेशनल मास्टर (IM) बनने का गौरव प्राप्त किया। यह उपलब्धि उन्हें अंतरराष्ट्रीय चेस जगत में एक नई पहचान दिलाने में अहम रही।
प्रगनानंदा की प्रतिभा यहीं नहीं रुकी। साल 2018 में, महज 12 साल की उम्र में, वे ग्रैंडमास्टर (GM) बन गए — जो शतरंज में खिलाड़ियों को दी जाने वाली सबसे ऊँची उपाधि होती है। इंटरनेशनल मास्टर (IM) से ऊपर ग्रैंडमास्टर की कैटेगरी होती है, जिसे पाना किसी भी खिलाड़ी के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।
इसके पहले 9 साल के आरित कपिल ने भी कार्लसन को किया था हैरान…
25 जून को एक और खास पल देखने को मिला जब दिल्ली के 9 वर्षीय आरित कपिल ने ऑनलाइन शतरंज टूर्नामेंट ‘अर्ली टाइटल्ड ट्यूसडे’ में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन के खिलाफ मुकाबला ड्रॉ कर सनसनी मचा दी है। आरित पूरे मुकाबले में बढ़त में थे और कार्लसन को हार की कगार पर ला खड़ा किया था।
हालांकि, अंत में उनके पास समय बहुत कम बचा था — सिर्फ कुछ सेकंड, जिसकी वजह से वह जीत को पूरी तरह हासिल नहीं कर सके। इस ड्रॉ मैच ने भी दुनिया को दिखा दिया कि भारत का अगला शतरंज सितारा तैयार हो रहा है।
कुछ दिनों पहले ही डी गुकेश ने कार्लसन को दी थी मात…
क्रोएशिया के जाग्रेब में चल रहे ग्रैंड चेस टूर्नामेंट 2025 के छठे राउंड में विश्व नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को हराकर सबको चौंका दिया था। इस जीत के साथ गुकेश टूर्नामेंट में 10 अंकों के साथ अकेले टॉप पर पहुंच गए थे।
यह गुकेश की कार्लसन पर लगातार दूसरी जीत है। इससे पहले उन्होंने पिछले महीने नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट में भी वर्ल्ड नंबर-1 को मात दी थी। लगातार दूसरी बार कार्लसन को हराना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि है, और गुकेश ने यह करके दिखाया है।
ये सनातनी #टीका है हर नजर से बचाकर बोलता है विश्व शतरंज चैंपियन भारतीय ग्रैंडमास्टर डी. गुकेश ने ग्रैंड शतरंज टूर रैपिड 2025 के जागरेब चरण में दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी नॉर्वे के मैग्नस कार्लसन को छठे राउंड में हरा दिया। वह 10 अंकों के साथ टूर्नामेंट में शीर्ष बढ़त पर आ गए हैं.… pic.twitter.com/XCg2PfWqC6
— Tiwari Archana ब्राह्मण (मै सेकुलर नही) 🚩 (@tiwari_archana7) July 4, 2025
नार्वे चेस टूर्नामेंट में भी कार्लसन को हरा चुके हैं गुकेश…
पिछले महीने 2 जून भारतीय ग्रैंडमास्टर और मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन डी. गुकेश ने नॉर्वे चेस टूर्नामेंट 2025 के छठे राउंड में गुकेश ने वर्ल्ड नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल फॉर्मेट में पहली बार हराया था। यह जीत गुकेश के करियर की एक बड़ी उपलब्धि मानी गई, क्योंकि इससे पहले वे कार्लसन के खिलाफ क्लासिकल शतरंज में कभी नहीं जीते।

हार के बाद कार्लसन का फूटा गुस्सा…
गुकेश के खिलाफ अप्रत्याशित हार से नाराज मैग्नस कार्लसन का गुस्सा मैच खत्म होते ही फूट पड़ा। उन्होंने गुस्से में चेस बोर्ड पर मुक्का मारा, जिससे मोहरे बिखर गए। हालांकि उन्होंने तुरंत ही अपने व्यवहार पर खेद जताते हुए गुकेश से माफी मांगी और उनकी पीठ थपथपाकर खेल भावना का परिचय भी दिया। इसके बाद कार्लसन ने मीडिया से कोई बात नहीं की और चुपचाप वेन्यू से चले गए।
कार्लसन ने उठाए थे गुकेश की चैंपियनशिप पर सवाल…
डी. गुकेश के वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद दिग्गज नॉर्वेजियन ग्रैंडमास्टर मैग्नस कार्लसन ने अप्रत्यक्ष रूप से उनकी उपलब्धि पर तंज कसते हुए कहा था, “मैं वर्ल्ड चैंपियनशिप में नहीं खेलता, क्योंकि वहां मुझे हराने वाला कोई नहीं है।”
गुकेश ने जबाव देते हुए कहा था कि- “अगर मौका मिला तो मैं खुद को उनके सामने बिसात पर परखना चाहूंगा।”

