
3 CM के खिलाफ PIL
मुख्यमंत्री धामी ने कहा था कि यदि “सनातन और देवभूमि की रक्षा” को हेट स्पीच कहा जाता है, तो वे इसे लाखों बार दोहराएंगे। CM के मुताबिक, जनसांख्यिकीय बदलाव जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा करना न तो असंवैधानिक है और न ही नफरत फैलाने की कोशिश। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में CM धामी समेत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयानों को संवैधानिक पद की गरिमा के खिलाफ बताकर हस्तक्षेप करने की मांग की गई है।
PIL Against CM Dhami: याचिका में क्या लिखा?
सुप्रीम कोर्ट में पूर्व उप राज्यपाल नजीब जंग के अलावा प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता रूप रेखा वर्मा, जॉन दयाल सहित कई लोगों ने कथित बांटने वाले शब्दों पर रोक लगाने की मांग की। साथ ही जनहित याचिका (PIL) भी दाखिल की है। आरोप लगाया गया कि संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं की भाषा माहौल बिगाड़ सकती है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से विभाजनकारी शब्दों के इस्तेमाल पर स्पष्ट दिशा निर्देश तय करने और राजनीतिक भाषण की सीमाएं तय करने की मांग की। याचिका में कई वरिष्ठ नेताओं के बयानों का भी जिक्र है।

CM ने आरोपों को किया खारिज
CM धामी का बयान तब विवादों में आया जब एक थिंक टैंक की रिपोर्ट में CM धामी को साल 2025 में “सबसे अधिक हेट स्पीच देने वाला नेता” बताया गया। उनके कई भाषणों को विभाजनकारी करार दिया गया। हालांकि मुख्यमंत्री ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने कभी किसी समुदाय के खिलाफ घृणा नहीं दिखाई। CM का कहना था कि उत्तराखंड केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत वाला राज्य है। देवभूमि की मूल पहचान को बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। अतिक्रमण, लैंड जिहाद या लव जिहाद जैसे विषय शासन और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे हैं, न कि नफरत फैलाने के।
