फर्जी पिज्जा हट और असली शर्मिंदगी: जब उद्घाटन बन गया मजाक
Pak Defence Minister Fake Pizza Hut Controversy :पाकिस्तान में राजनीति अक्सर अपने अजीब किस्सों के लिए चर्चा में रहती है, लेकिन इस बार मामला कुछ ज़्यादा ही अनोखा हो गया। देश के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ खुद एक ऐसे विवाद के केंद्र में आ गए, जिसे देखकर लोग पहले चौंके और फिर हँस पड़े।

सियालकोट कैंटोनमेंट इलाके में एक पिज्जा हट ब्रांड वाले आउटलेट का उद्घाटन बड़े ठाठ से किया गया। फीता काटा गया, तस्वीरें ली गईं, कैमरों के सामने मुस्कान बिखेरी गई। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। असली मोड़ कुछ घंटों बाद आया।
Pak Defence Minister Fake Pizza Hut Controversy: कंपनी ने कहा: हमारा इससे कोई संबंध नहीं
जैसे ही उद्घाटन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर फैलने लगे, पिज्जा हट पाकिस्तान की ओर से एक आधिकारिक बयान सामने आया। बयान सीधा और साफ था। कंपनी ने कहा कि जिस आउटलेट का उद्घाटन किया गया है, उसका पिज्जा हट ब्रांड से कोई लेना-देना नहीं है।
मतलब साफ था। जिसे ब्रांडेड समझकर रिबन काटा गया, वह आउटलेट असल में फर्जी निकला।यह खुलासा होते ही मामला सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं रहा, बल्कि सार्वजनिक मजाक में बदल गया।
वायरल तस्वीरें और बढ़ती किरकिरी
वायरल वीडियो में ख्वाजा आसिफ कैंची हाथ में लिए उद्घाटन करते दिखाई देते हैं। आउटलेट को गुब्बारों से सजाया गया था, बाहर पिज्जा हट जैसा साइनबोर्ड लगा था और पूरा माहौल किसी असली फ्रेंचाइजी जैसा दिखाने की कोशिश की गई थी।
लेकिन ब्रांड के खंडन के बाद वही तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर अलग ही कहानी कहने लगीं। लोग सवाल उठाने लगे कि आखिर रक्षा मंत्री जैसे वरिष्ठ पद पर बैठे व्यक्ति से इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया
मामला सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने इसे गंभीर लापरवाही बताया, तो कई यूजर्स ने इसे पाकिस्तान की राजनीतिक संस्कृति पर तंज कसने का मौका बना लिया।
एक यूजर ने लिखा कि देश में ऐसे लोग बड़े पदों पर बैठे हैं, जिन्हें यह तक पता नहीं कि वे किसका उद्घाटन कर रहे हैं। वहीं दूसरे यूजर ने चुटकी लेते हुए कहा कि जब खुद पिज्जा हट कह दे कि यह हमारी स्लाइस नहीं है, तो फिर उद्घाटन किस बात का था।
सिर्फ एक गलती या सिस्टम की कहानी?
यह घटना सिर्फ एक फर्जी आउटलेट तक सीमित नहीं है। यह उस सिस्टम की भी तस्वीर दिखाती है, जहां नाम, ब्रांड और दिखावे पर भरोसा कर लिया जाता है, बिना सही जांच के।
रक्षा जैसे अहम मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्ति से यह उम्मीद की जाती है कि वह हर सार्वजनिक कार्यक्रम से पहले बुनियादी जांच जरूर करेगा। लेकिन यहां मामला उल्टा पड़ गया।
