
pakistan china weapons claimed: जब कोई देश खुलेआम कह दे कि उसकी लड़ाकू क्षमता ने दुश्मन के कई विमान गिरा दिए, तो यह सिर्फ एक सैन्य बयान नहीं रह जाता — यह भावनाओं, तर्कों और सुरक्षा के सवालों का तूफ़ान बन जाता है। हाल में पाकिस्तानी सेना प्रवक्ता जनरल अहमद चौधरी के ब्लूमबर्ग इंटरव्यू ने ठीक यही तूफ़ान खड़ा किया: उन्होंने कहा कि चीनी हथियारों ने मई के संघर्ष में बेहतरीन प्रदर्शन किया और पाकिस्तान ने सात भारतीय फाइटर जेट मार गिराए—जबकि भारत ने कोई पाक विमान नहीं गिराया।
दावे, सबूत और विरोधी दलीलें
चौधरी साहब का यह दावा सीधे-सादे तरीके से बड़ा और संवेदनशील है। उनके शब्दों के साथ दूसरा पक्ष भी है: रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ने PL-15E मिसाइल का मलबा पंजाब के होशियारपुर जिले में 9 मई को बरामद किया; 12 मई को वायु सेना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मलबे का खुलासा किया। यानी वास्तविक कार्रवाई और मलबे का होना यह दर्शाता है कि भारत की एयर-डिफेंस सिस्टम ने कुछ हथियारों को निष्प्रभावी किया।
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स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) का आँकड़ा भी दिलचस्प है: 2020–2024 के बीच पाकिस्तान के हथियारों का करीब 81% चीन से आया यही वजह है कि पाक सेना द्वारा चीनी हथियारों की तारीफ की जाना पूरी तरह से आश्चर्यजनक नहीं। पर एक महत्वपूर्ण पर्दा यह भी उठता है: अगर आप किसी गाँव के खेत में मलबा देख लें, तो उसके आस-पास के लोगों की ज़िन्दगी पर असर क्या पड़ेगा? इससे तरह-तरह के सवाल उठते हैं — सुरक्षा, नागरिक भय, और राजनयिक तनाव।
जनता की चिंता और मीडिया की भूमिका
एक छोटे से शहर में रहने वाले किसान की आँखों के सामने यदि विमान का मलबा गिरता है, तो वह केवल ‘सैनिक घटनाक्रम’ नहीं देखता — वह अपने घर, फसलों और बच्चों की सुरक्षा देखता है। इसी चिंता को मीडिया अक्सर व्यक्तियों की आवाज़ से जोड़कर दिखाता है। दूसरी तरफ, नेताओं और सेनाप्रवक्ताओं के बयानों से भावनाएँ और तेज़ हो जाती हैं कभी गर्व, कभी भय, और अक्सर ग़लतफहमी।
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