पाकिस्तान में फील्ड मार्शल मुनीर अगला राष्ट्रपति, PM बदलने की साज़िश गरम
पाकिस्तान में सियासी गतिरोध एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। चर्चाएँ तेज है कि मौजूदा राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को पद छोड़ने को कहा जा सकता है और उनके स्थान पर सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को राष्ट्रपति बनाये जाने की संभावनाओं को बल मिल रहा है। साथ में, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार को कमजोर कर बिलावल भुट्टो-जरदारी को पीएम बनाये जाने की थ्योरी भी तेज़ी पकड़ रही है।
‘सॉफ्ट कू’: तख्तापलट बिना बंदूक, संविधान से छल
विश्लेषकों का कहना है कि यह कू बंदूकबाधित नहीं, बल्कि ‘सॉफ्ट कू’ है—जहां संसद, न्यायपालिका और मीडिया पर सेना का नियंत्रण तलवार की तरह लटका हुआ है। असीम मुनीर की विदेश यात्राएं (वॉशिंगटन, रियाद, बीजिंग) इस बात की गवाही देती हैं कि वे सिर्फ ‘प्रतीकात्मक राष्ट्रपति’ नहीं बनना चाहते, बल्कि स्थायी सत्ता में बदलाव लाने की योजना बना रहे हैं ।
सेना प्रमुख असीम मुनीर को फील्ड मार्शल बनाया गया
20 मई 2025 को पाकिस्तानी कैबिनेट ने असीम मुनीर को फील्ड मार्शल का दर्जा दिया—यह पद पिछली बार केवल अयूब ख़ान को ही मिला था । यह पांच-सितारा रैंक उन्हें जीवन भर सैन्य विशेषाधिकार और कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। सरकारी बयान में इसे पाकिस्तानी रक्षा और रणनीति में निर्णायक वीरता का संकेत बताया गया ।

सोशल मीडिया और विपक्ष में इसे सेना का आत्म-प्रचार माना जा रहा है। आलोचकों ने इसे ‘फेल्ड मार्शल’ कहकर ट्रोल किया । ज्यादातर नेटिजेंट्स ने पूछा कि यदि हालिया संघर्ष में सेनाएं सफल नहीं रहीं तो यह रैंक किस आधार पर दी गई?
प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ की चुनौती और PML-N की लड़ाई
सेना-प्रधानत्रिओं—मुनीर और जरदारी—के बढ़ते समीकरणों पर PML‑N ने विरोध की भंवरें तेज कर दी हैं। शहबाज-नवाज़ परिवार को डर है कि राष्ट्रपति प्रणाली लागू होने पर उनकी पार्टी का राजनीतिक अस्तित्व खत्म हो सकता है। PML‑N आर्मी के विभिन्न धड़ों में संपर्क में है, ताकि बिलावल को पीएम बनाने की प्रक्रिया को रोका जा सके।
बिलावल कभी पीएम, कभी राज्यपाल
पीपीपी की उच्च स्तर बैठक में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि अगर संसदीय प्रणाली बनी रहे, तो बिलावल भुट्टो-जरदारी को प्रधानमंत्री बनाया जाना चाहिए। एक शर्त ऐसी बनाई गई कि जरदारी तब तक इस्तीफा नहीं देंगे जब तक बिलावल को कोई बड़ा पद—चाहे वह पीएम हो या गवर्नर—नहीं मिल जाता ।
सेना कैसे संसदीय प्रणाली को बदलना चाहती है?
सेना प्रमुख असीम मुनीर संसद, न्यायपालिका और मीडिया पर पहले ही मजबूत पकड़ बना चुके हैं। अब योजना है संविधान में संशोधन कर राष्ट्रपति-प्रधान व्यवस्था लागू करने की, जिसे वह अधिक निजी और स्थायी सत्ता का आधार बना सकें। यह रणनीतिक कदम 1977 के जिया-उल-हक के कू की तरह प्रतीत होता है, लेकिन पारंपरिक सैन्य तख्तापलट के बजाय ‘सॉफ्ट’ विधि द्वारा लागू होगी।
इतिहास : तीन सेना प्रमुख बने राष्ट्रपति
पाकिस्तान की पूर्व-इतिहास में तीन सेना प्रमुख संविधान को दरकिनार कर राष्ट्रपति बने:
- अयूब खान (1958 के कू के बाद)
- जिया-उल-हक (1977 के तख्तापलट के बाद)
- परवेज मुशर्रफ (1999 के कू के बाद)
पहले तीनों ने जाड़ों की तरह सत्ता को हाथ में लिया जबकि कोई भी प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया।

सेना प्रमुख असीम मुनीर की तानाशाही की राह?
पाकिस्तान में राजनीतिक संतुलन एक बड़े मोड़ पर है। असीम मुनीर का फील्ड मार्शल बनना और राष्ट्रपति बनने की चर्चाएँ, साथ में शहबाज को हटाने और बिलावल को पीएम बनाने की योजना दर्शाती है कि सेना अब सिर्फ बाहर से समर्थन नहीं दे रही, बल्कि अंदर का बदलाव स्वयं कर रही है—यह ‘सॉफ्ट कू’ की स्पष्ट तस्वीर बन रही है।
Read More :- समय से पहले लोन चुकाने पर नहीं लगेगा चार्ज: RBI का बड़ा फैसला 2026 से लागू
