घटना का प्रारंभिक विवरण
3 मई की रात डायल 112 पर मिली सूचना के आधार पर पुलिस को बताया गया कि अजय तिवारी का थार गाड़ी और बाइकों से सशस्त्र बदमाशों ने अपहरण कर लिया। परिवार के विरोध करने पर बदमाशों ने मारपीट भी की। इस सूचना के बाद पुलिस ने तत्काल चार टीमें गठित कीं और सघन तलाशी अभियान शुरू किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुखपुरा थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया था और जांच तेज कर दी गई थी। शुरुआती जांच में पुलिस को यह मामला संदिग्ध लगा, लेकिन राजनीतिक दबाव और मीडिया कवरेज के कारण इसे हाई-प्रोफाइल माना गया। [caption id="attachment_81805" align="alignnone" width="300"]
ओमवीर सिंह(पुलिस अधीक्षक बलिया)[/caption]
अजय तिवारी की वापसी और खुलासा
13 दिनों बाद, 12 मई 2025 की शाम को अजय तिवारी स्वयं बलिया पुलिस कार्यालय पहुंचे। उन्होंने पुलिस को बताया कि पारिवारिक विवाद के कारण वह अपनी मर्जी से घर छोड़कर किसी तीर्थस्थल के लिए निकल गए थे। एसपी ओमवीर सिंह ने प्रेस को बताया कि अजय के इस बयान के बाद नामजद सभी आरोपियों को छोड़ दिया गया है। साथ ही, फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। पुलिस ने इस मामले को सुनियोजित साजिश का हिस्सा मानते हुए आगे की जांच शुरू कर दी है। Read More: BALIYA NEWS: बलिया में सनसनीखेज वारदात, खेत के किनारे मिला टुकड़ों में बंटा शव, इलाके में दहशतBallia Kidnapping Case Update: राजनीतिक विवाद और आरोप
इस मामले ने स्थानीय राजनीति को भी गरमा दिया था। सत्ता पक्ष के नेताओं, विशेष रूप से पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी और बीजेपी विधायक केतकी सिंह ने एक विशेष समुदाय पर अपहरण का आरोप लगाते हुए कठोर कार्रवाई और बुलडोजर की मांग की थी। वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) के जिला अध्यक्ष और फेफना विधायक संग्राम सिंह यादव ने इसे सत्ता पक्ष की साजिश करार दिया। उन्होंने उपेंद्र तिवारी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह मामला जातिगत कार्ड खेलकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश थी। सपा नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग की थी, जो अब पुलिस के खुलासे के बाद सही साबित हुई। [caption id="attachment_81800" align="alignnone" width="300"]
संग्राम सिंह यादव(फेफना विधायक & सपा जिलाध्यक्ष बलिया[/caption]