
Madhya pradesh के बैतूल में जिला चिकित्सालय लगातार विवादों में बना हुआ है प्रसूताओं की मौत का अड्डा बन हुआ है लगातार हो रही मौतों और सीएस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे लाखो सवाल आखिर क्यों कोई कार्यवाही नही होती सीएस डॉ अशोक बारंगा पर क्या है कोई राजनीतिक संरक्षण या मूल निवासी होने का उठा रहे है फायदा सीएस बनने के बाद से ही लगातार आ रहे है नए नए मामले सामने प्रसूताओं की मौत के मामले तो थे ही रिश्वत कांड के बाद भी कोई कार्यवाही नही होना डॉ धाकड़ को दिया जा रहा है संरक्षण सीएस के द्वारा सूत्रों की माने तो किसी बड़े नेता का हाथ है सीएस पर यही कारण है कोई कार्यवाही नही होती सीएस पर अभी एक ताजा और सनसनी खेज मामला सामने आया है जहाँ आमला जनपद अंतर्गत आने वाले ग्राम जम्बाड़ा निवासी प्रसूता डिलेवरी के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती हुई थी और उसने सीजर से एक बेटी को जन्म दिया था पर सीजर के दौरान हुई लापरवाही के चलते महिला को पेट मे दर्द की शिकायत शुरू हो गई उसके बाद उसे फिर से जिला चिकित्सालय में भर्ती किया गया बिना किसी जांच के
प्रसूता को पेटदर्द की दवाएं देकर उसे 3 दिन में डिस्चार्ज कर दिया गया उसके बाद परिजनों ने महिला को निजी अस्पताल में भर्ती कराया जहाँ जांच के बाद आंतो में सूजन होना बताया गया जब महिला का ऑपरेशन किया गया तो निजी अस्पताल के डॉ भी उस वक्त हैरान हो गए कि आंते सीजर के बाद से आपस मे चिपकी हुई है और उसकी छोटी आंत में एक हैंड टॉवल फसा पाया गया जिसे निकाला गया डॉ ने बताया कि कपड़ा नही निकाला जाता तो महिला की जान भी जा सकती थी इस तरह की लापरवाही जिला चिकित्सालय में होना डॉक्टर्स की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर रही है अब देखना यह होगा इस पूरे मामले में सीएस की कार्यप्रणाली को लेकर और दोषी डॉक्टर्स पर जिले के तेजतर्रार माने जाने वाले कलेक्टर क्या कार्यवाही करते है ।
