Naxalism Politics: नक्सलवाद के खात्मे को लेकर राजनीति में तीव्र बहस छिड़ गई है। भाजपा ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज को नक्सलियों का हमदर्द बताते हुए सोशल मीडिया पर तीखा हमला किया है। वहीं, दीपक बैज ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा की कमजोर स्थिति को दबाने के लिए ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं, इसलिए भाजपा तिलमिला रही है।

Naxalism Politics: भाजपा उसी नीति को आगे बढ़ा रही
दीपक बैज ने भूपेश बघेल की नक्सलियों के सरेंडर पर तारीफ के बाद सवाल उठाए हैं कि सरकार को नक्सलियों के प्रोफाइल सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने कहा कि 2000 नक्सलियों ने सरेंडर किया है, तो 2000 हथियार कहां हैं? कितने इनामी नक्सली हैं और वे किन अपराधों में शामिल थे, यह भी बताना जरूरी है। अगर सच में असली नक्सली सरेंडर हो रहे हैं तो यह अच्छी बात है। बैज ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस की नीति के कारण ही नक्सलवाद में कमी आई है और भाजपा उसी नीति को आगे बढ़ा रही है।
Naxalism Politics: अपने बयान बदलती रहती है
बैज ने केंद्र सरकार और अमित शाह के बयान पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने नक्सल प्रभावित इलाकों में कैंप बनवाए और पट्टे दिए, जिससे लोगों का भरोसा जीता गया। जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले कांग्रेस की नीति की तारीफ करते थे, अब वे कांग्रेस की आलोचना कर रहे हैं। बैज ने कहा कि भाजपा बार-बार अपने बयान बदलती रहती है और असलियत छिपाती है।
भाजपा उसी नीति को अपनाकर आगे बढ़ रही
इसके अलावा, बैज ने भाजपा पर सलवा जुडूम आंदोलन को गलत दिशा में ले जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने निहत्थे लोगों को हथियार देकर इस आंदोलन को हाईजैक किया और चुनावी लाभ उठाया। उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि बस्तर के विकास के लिए भाजपा ने पिछले दो वर्षों में क्या किया? बैज ने कहा कि कांग्रेस की नीतियों के कारण ही नक्सलवाद 65 प्रतिशत कम हुआ था, जबकि अब भाजपा उसी नीति को अपनाकर आगे बढ़ रही है।
इसे वापस लेने का आदेश देना चाहिए
जमीन की रजिस्ट्री से ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता खत्म किए जाने पर भी दीपक बैज ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह फैसला किसान विरोधी है और इससे किसान असुरक्षित होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे फर्जी रजिस्ट्री और धोखाधड़ी की आशंका बढ़ेगी। बैज ने कहा कि ऋण पुस्तिका किसान की पहचान और जमीन की प्रमाणिकता का आधार होती है, जिसे खत्म करना गलत है। सरकार को इसे वापस लेने का आदेश देना चाहिए।
सत्तारूढ़ सरकार पर दबाव बना रहे हैं
इस प्रकार, नक्सलवाद के खात्मे को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी राजनीति जारी है, जिसमें दोनों पक्ष अपने-अपने दृष्टिकोण को लेकर आम जनता और सत्तारूढ़ सरकार पर दबाव बना रहे हैं।
