Naxal Commander Surrenders in Bijapur : छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से बड़ी खबर सामने आ रही है। नक्सलियों के टॉप कमांडर में से एक रूपेश अब मुख्यधारा में लौटने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, वह अपने 140 साथियों के साथ आत्मसमर्पण करने वाला है। यह आत्मसमर्पण बीजापुर में होने की संभावना है।
कौन है नक्सली कमांडर रूपेश?
रूपेश दक्षिण बस्तर इलाके में सक्रिय एक कुख्यात नक्सली कमांडर है। उस पर कई पुलिस थानों में हत्या, लूट, अपहरण, सुरंग ब्लास्ट जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह पिछले कई सालों से जंगलों में रहकर नक्सली गतिविधियों को अंजाम दे रहा था।उसकी छवि एक क्रूर लेकिन प्रभावशाली नेता के रूप में रही है, जिसके पास हथियारबंद लड़ाकों की एक बड़ी टीम थी।
READ MORE:दिवाली से पहले ठप हुई सफाई व्यवस्था: वेतन न मिलने पर सफाईकर्मी हड़ताल पर, शहर में फैली गंदगी
140 साथियों के साथ आत्मसमर्पण
रूपेश अकेले नहीं, बल्कि करीब 140 नक्सली लड़ाकों के साथ आत्मसमर्पण करेगा। यह संख्या अपने आप में बहुत बड़ी है और नक्सल संगठन के लिए झटका मानी जा रही है।यह सभी नक्सली कई सालों से जंगल में रहकर पुलिस और सुरक्षा बलों से लुका-छिपी का खेल खेलते आ रहे थे। आत्मसमर्पण के साथ ही ये सभी अब समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं।
सूत्रों के अनुसार, आत्मसमर्पण बीजापुर जिला मुख्यालय में होगा। प्रशासन और पुलिस द्वारा इस कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जिला कलेक्टर, एसपी और अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद रहेंगे।
इस कार्यक्रम में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सुरक्षा, नौकरी और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी।
क्यों कर रहे हैं आत्मसमर्पण?
रूपेश और उसके साथियों के आत्मसमर्पण के पीछे कई वजहें हैं
लगातार पुलिस दबाव और सर्च ऑपरेशन
जंगलों में खराब जीवन स्थिति
स्वास्थ्य सुविधाओं और शिक्षा की कमी
सरकार की पुनर्वास नीति का असर
सूत्रों के अनुसार कई नक्सली लंबे समय से संगठन छोड़ना चाहते थे लेकिन डर के कारण बाहर नहीं निकल पा रहे थे। अब जब रूपेश जैसा बड़ा कमांडर आगे आया है, तो बाकी भी उसके साथ आने को तैयार हो गए।
प्रशासन ने किया स्वागत
बीजापुर प्रशासन और पुलिस ने इस फैसले का स्वागत किया है। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि शांति की ओर एक बड़ा कदम है।
सरकार की कोशिश है कि जो भी नक्सली आत्मसमर्पण करें, उन्हें समाज में सम्मान के साथ नई जिंदगी जीने का मौका मिले।
रूपेश और उसके 140 साथियों का आत्मसमर्पण नक्सल समस्या से जूझ रहे छत्तीसगढ़ के लिए एक बड़ी कामयाबी है। इससे यह भी संदेश जाता है कि अब नक्सली रास्ता छोड़कर लोग शांति और विकास की ओर बढ़ना चाहते हैं।अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में और कितने नक्सली हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ते हैं।
