जब बालकनी के ऊपर से गुजरी फ्लाईओवर की बीम: नागपुर की इस तस्वीर ने देशभर को चौंका दिया
nagpur flyover balcony controversy: कल्पना कीजिए आप अपने घर की बालकनी में खड़े हैं, सुबह की चाय के साथ हवा का आनंद ले रहे हैं… और कुछ ही फीट ऊपर, एक कंक्रीट की बीम आपके सिर के ऊपर से गुजर रही है।

यह कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि नागपुर की हकीकत है।
998 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा फ्लाईओवर, शहर के इंदोरा से दीघोरी को जोड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है। लेकिन इसके एक हिस्से ने सोशल मीडिया पर तब हलचल मचा दी, जब एक वीडियो सामने आया जिसमें फ्लाईओवर की बीम सीधे एक घर की बालकनी के ऊपर से गुजरती नजर आई।
सिस्टम की कहानी: ‘हम सही हैं’, ‘हमें बताया ही नहीं गया’
NHAI (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) का कहना है कि फ्लाईओवर का डिजाइन बिलकुल सही है। जब प्रोजेक्ट शुरू हुआ, तब घर और बीम के बीच 1.5 मीटर की दूरी थी। NHAI के मुताबिक, बालकनी बाद में बनाई गई, इसलिए अब इसे अवैध निर्माण मानकर तोड़ दिया जाएगा।
लेकिन नगर निगम की बात कुछ और है। उनका कहना है कि उन्हें न तो डीटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) दिखाई गई और न ही कोई पूर्व सूचना मिली। अब जब मामला वायरल हो गया, तब जाकर जानकारी दी गई। बालकनी को अवैध घोषित करने की प्रक्रिया में समय लगेगा।
घर का मालिक क्या कहता है?
फ्लाईओवर तो घर से 15-16 फीट ऊपर है, कोई खतरा नहीं है। लोग बेवजह इसे मुद्दा बना रहे हैं।
असली सवाल: यह लापरवाही नहीं तो क्या है?
यह मुद्दा सिर्फ एक बालकनी या एक फ्लाईओवर की तकनीकी गलती नहीं है।
यह सिस्टम की पुरानी बीमारी का लक्षण है ‘एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालो और बच निकलो’।
- जब अरबों रुपये के प्रोजेक्ट्स पर काम होता है, तो क्या लोगों की जान-माल की सुरक्षा सिर्फ कागजों पर छोड़ दी जाती है?
- अगर यह बालकनी अवैध थी, तो बनते वक्त किसने आंखें मूंदी?
- और अगर वैध थी, तो फिर फ्लाईओवर को इतना करीब क्यों लाया गया?
सोचिए, यह आपके घर में होता तो?
आपका अपना घर, जहां आप बच्चों के साथ आराम से रह रहे हों और अचानक एक दिन सरकारी प्रोजेक्ट आपकी खिड़की से झांकने लगे।
क्या आप नॉर्मल रह पाते?

नागपुर का यह मामला एक जागती आंखों का सपना नहीं, एक भयानक सिस्टम फेलियर का उदाहरण है। और ऐसे हादसे तब तक होते रहेंगे, जब तक हम ये सवाल पूछना नहीं छोड़ते
जनता के लिए बन रहे प्रोजेक्ट्स में जनता की राय कहां है?
जिम्मेदार कौन?
फिलहाल, NHAI और नगर निगम एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं। मकान मालिक बेफिक्र दिख रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग मीम बना रहे हैं। लेकिन असली चिंता ये होनी चाहिए कि अगर कल को फ्लाईओवर से कुछ गिरा, अगर वाइब्रेशन से दीवारें दरक गईं, अगर हादसा हुआ तब कौन जवाब देगा?
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