MP new tiger reserve first census : मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में रातापानी टाइगर रिजर्व को आधिकारिक रूप से टाइगर रिजर्व घोषित किया है। यह प्रदेश का आठवां टाइगर रिजर्व है। रातापानी वन्यजीव अभयारण्य 1,271.4 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें कोर क्षेत्र 763.8 वर्ग किलोमीटर और बफर क्षेत्र 507.6 वर्ग किलोमीटर शामिल हैं। इसे राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) से अनुमोदित किया गया है।
पहली बार बाघों की गिनती और पेपरलेस प्रक्रिया
इस टाइगर रिजर्व में पहली बार बाघों की गणना की जाएगी जो पूरी तरह से पेपरलेस होगी। इस प्रक्रिया में ट्रैप कैमरे लगाए जाएंगे जिनसे बाघों की गतिविधियों की रिकॉर्डिंग होगी। इससे बाघों की संख्या का सटीक अनुमान लगाने में सहायता मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण में यह एक आधुनिक तकनीक साबित होगी।
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बाघों की संख्या और संरक्षण की योजना
रातापानी टाइगर रिजर्व में लगभग 90 से अधिक बाघ रहते हैं और संख्या में वृद्धि जारी है। इस क्षेत्र में कई बाघिन शावकों के साथ मूवमेंट कर रहे हैं। वन्यजीव अधिकारियों का कहना है कि 2026 तक प्रदेश में बाघों की संख्या 1100 के आसपास पहुंच सकती है। इन बाघों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें गुफाओं और गोपनीय क्षेत्रों की मदद से बाघों का संरक्षण प्राथमिकता है।
पर्यावरणीय महत्व और पर्यटन बढ़ावा
रातापानी टाइगर रिजर्व भोपाल, रायसेन और सीहोर जिलों में विंध्याचल पर्वतों के नजदीक स्थित है। इसके अंदर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भी शामिल है। नए टाइगर रिजर्व बनने से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे अर्थव्यवस्था को भी मदद मिलेगी।
रातापानी टाइगर रिजर्व का गठन मध्य प्रदेश की वन्यजीव संरक्षण नीति में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। पेपरलेस बाघ गणना के माध्यम से संरक्षण के नए युग की शुरुआत होगी और प्रदेश में बाघों की वृद्धि दर को भी प्रोत्साहन मिलेगा। यह क्षेत्र न केवल वन्यजीव प्रेमियों बल्कि पर्यावरण के लिए भी अत्यंत मूल्यवान साबित होगा।
