Madhya Pradesh Cough Syrup Scandal : छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड में जबलपुर के कटारिया फार्मास्युटिकल की दुकान और गोदाम सील कर दिया गया है। यह कार्रवाई बच्चों की मौत के बाद हुई, जिसमें सिरप की सप्लाई के स्रोत मिले है चेन्नई की श्री सन या श्रेसन फार्मास्युटिकल कंपनी से बीते 20 वर्षों से डीलरशिप थी,वही सिरप इस्तेमाल किए गए थे।
घटना की शुरुआत
छिंदवाड़ा और बैतूल जिलों में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत हो गई। प्रशासनिक जांच में सामने आया कि जबलपुर की कटारिया फार्मास्युटिकल्स ने लगभग 660 बोतलें चेन्नई की कंपनी से मंगवाकर सप्लाई की थीं, जिनमें से ज़्यादातर बोतलें छिंदवाड़ा भेजी गईं। बच्चों की स्थिति बिगड़ने से जब मौतें हुईं, तब इस सिरप के सैंपल लैब भेजे गए।
सिरप में जहरीले रसायन
जांच में सामने आया कि सिरप में डायएथिलीन ग्लायकॉल जैसे जहरीले रसायन मिले, जो किडनी फेल्योर के लिए जिम्मेदार थे। लैब रिपोर्ट के बाद इस सिरप को अमानक घोषित कर दिया गया और बचे हुए स्टॉक पर तुरन्त कार्रवाई की गई।
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कटारिया फार्मास्युटिकल सील
जबलपुर के नौदरा ब्रिज इलाक़े में स्थित कटारिया फार्मास्युटिकल का दुकान और गोदाम प्रशासन की टीम ने सील कर दिया है। सरकारी दस्तावेज़, स्टॉक और सिरप की सभी बोतलें जब्त हैं। कंपनी के संचालक से पूछताछ जारी है।
चेन्नई की कंपनी से डीलरशिप
जानकारी के मुताबिक, कटारिया फार्मास्युटिकल को तमिलनाडु (चेन्नई) की श्रीसन या श्रेसन फार्मा कंपनी की डीलरशिप 20 वर्षों से प्राप्त थी। इसी कंपनी के कोल्ड्रिफ कफ सिरप बोतले छिंदवाड़ा भेजी गई थीं। सिरप को प्रतिबंधित कर दिया गया है और डीलरशिप का पूरा ब्योरा प्रशासन ने जब्त कर लिया है।
प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका
जांच के दौरान ड्रग इंस्पेक्टर, तहसीलदार और अन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया। दवा के सैंपल को भोपाल लैब एंड तमिलनाडु लैब भेजा गया था। दोषी पाए जाने पर कटारिया फार्मास्युटिकल और निर्माण कंपनी दोनों के खिलाफ FIR दर्ज हो सकती है।
छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड अभी भी जांच के दायरे में है और इस कार्रवाई से संभावित दोषियों तक प्रशासन की पहुंच तेज हुई है।
