mohan bhagwat: संघ की शताब्दी वर्ष की व्याख्यान शृंखला ‘संघ की 100 साल की यात्रा: नए क्षितिज’ के पहले दिन मुंबई में एक दिलचस्प पल देखने को मिला। मंच से बोलते हुए सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने छात्रों और फैशन का उदाहरण दिया और बात सीधे बॉलीवुड स्टार सलमान खान तक पहुंच गई। मज़ेदार बात ये रही कि सलमान खुद सामने बैठकर पूरा संबोधन सुन रहे थे, और मुस्कराते भी दिखे।
कार्यक्रम में डॉ. भागवत ने एक बार फिर दोहराया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ न किसी का विरोध करता है और न ही सत्ता की चाह में काम करता है। संघ का फोकस, उन्होंने कहा, राष्ट्रीय एकता और समाज को जोड़ने पर है। इसी बात को समझाने के लिए उन्होंने युवाओं के फैशन सेंस का उदाहरण सामने रखा।
mohan bhagwat: “समाज फैशन से चलता है”
डॉ. भागवत ने कहा कि समाज अक्सर तर्क से नहीं, फैशन से चलता है. उन्होंने कहा, सिनेमा में सलमान खान क्या पहनते हैं, कॉलेज के छात्र वही पहनना शुरू कर देते हैं. जब उनसे पूछा जाता है कि ऐसा क्यों पहना है, तो जवाब मिलता है क्योंकि सलमान ने पहना है। और जब ये पूछा जाए कि सलमान ने क्यों पहना, तो इसका कोई उत्तर नहीं होता.उनका कहना था कि ये सिर्फ कपड़ों की बात नहीं है। अच्छी बात हो या बुरी, समाज में कई चीजें इसी तरह बिना सोचे-समझे अपनाई जाती हैं।
mohan bhagwat: “फैशन तय करने वाले समाज के विश्वासपात्र होते हैं”
संघ प्रमुख ने कहा कि फैशन अपने आप नहीं बनता। उसे कुछ लोग तय करते हैं, जिन्हें समाज मानता है, जिन पर भरोसा करता है. उन्होंने ऐसे लोगों को अपनी भाषा में “महाजन” बताया, यानी वे लोग जिनकी बात, जिनका आचरण, समाज के लिए मानक बन जाता है.जब डॉ. भागवत ये बात रख रहे थे, उसी वक्त दर्शक दीर्घा में बैठे सलमान खान पूरे ध्यान से उन्हें सुनते रहे। कई बार उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान भी दिखी, जिसे लोग नोटिस किए बिना नहीं रह सके।
Also Read-एपस्टीन फाइल्स में आया अंबानी का नाम, लंबी स्वीडिश ब्लॉन्ड महिला अरेंज करने को लेकर बात
“हमारे आदर्शों की कोई कमी नहीं”
अपने संबोधन के दौरान डॉ. भागवत ने एक श्लोक का भी उल्लेख किया। उसका आशय बताते हुए उन्होंने कहा कि सामान्य व्यक्ति पर लोग जल्दी भरोसा नहीं करते, लेकिन जिनसे वे प्रभावित होते हैं, जिनको अच्छा मानते हैं, उन्हीं को फॉलो करते हैं।उन्होंने कहा कि ऐसा होना भी चाहिए, लेकिन ध्यान ये रखना ज़रूरी है कि किसे आदर्श बनाया जा रहा है.हमारे समाज में आदर्शों की कोई कमी नहीं है. उन्होंने कहा.ज़रूरत है उन्हें पहचानने और समझदारी से अपनाने की.दो दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम के पहले दिन का ये हिस्सा खासा चर्चा में रहा। अब देखना होगा कि दूसरे दिन संघ की शताब्दी यात्रा को लेकर और कौन से सामाजिक संदेश सामने आते हैं।
