modi xi jinping meeting sco summit 2025 india: ड्रैगन और हाथी की दोस्ती – जब दो महाशक्तियों के नेता मिले

सात साल बाद चीन की धरती पर कदम रखने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यहाँ एक ऐसे मौके पर थे, जहाँ हर शब्द, हर इशारा, और हर मुलाकात का मतलब था—भारत और चीन के बीच के रिश्तों का भविष्य। राष्ट्रपति शी जिनपिंग से उनकी 50 मिनट की बातचीत में न सिर्फ सीमा पर शांति की उम्मीदें जगीं, बल्कि दुनिया को यह संदेश भी गया कि ड्रैगन और हाथी—दो महाशक्तियाँ—साथ चल सकती हैं।
सैनिकों की वापसी और विश्वास का निर्माण
पिछले साल कजान में हुई मोदी-जिनपिंग की मुलाकात के बाद से ही दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की एक लहर दौड़ गई थी। आज, तियानजिन में, मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद शांति और स्थिरता का माहौल बना है।” यह कोई साधारण बात नहीं थी। गलवान घाटी की झड़प के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव का दौर चला था, लेकिन अब कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हो गई है, सीधी उड़ानें बहाल हो रही हैं, और विशेष प्रतिनिधियों ने सीमा मुद्दे पर समझौता किया है।
#WATCH | Tianjin, China: During his bilateral meeting with Chinese President Xi Jinping, Prime Minister Narendra Modi says, “Last year in Kazan, we had very fruitful discussions which gave a positive direction to our relations. After the disengagement on the border, an atmosphere… pic.twitter.com/IT9leLWI3j
— ANI (@ANI) August 31, 2025
ड्रैगन और हाथी: एक साथ चलने की चुनौती
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक दिलचस्प उदाहरण दिया—“ड्रैगन (चीन) और हाथी (भारत) को साथ आना चाहिए।” यह सिर्फ एक उपमा नहीं थी, बल्कि एक संदेश था। दुनिया की दो सबसे बड़ी आबादी वाले देश, दो प्राचीन सभ्यताओं के वारिस, और ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण सदस्य—क्या ये दोनों वास्तव में एक-दूसरे की सफलता में सहायक बन सकते हैं?
मोदी ने भी इस बात पर जोर दिया कि “भारत और चीन के सहयोग से 2.8 अरब लोगों को फायदा होगा।” यह सिर्फ आंकड़ा नहीं है, बल्कि एक सपना है—एक ऐसा सपना जहाँ दोनों देश मिलकर मानवता के कल्याण का रास्ता खोल सकते हैं। लेकिन क्या यह सपना साकार होगा? या फिर यह सिर्फ एक राजनयिक बयानबाजी है?
SCO समिट: दुनिया की निगाहें तियानजिन पर
मोदी आज तियानजिन में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में हिस्सा लेंगे। इस बार SCO समिट इतिहास की सबसे बड़ी समिट बन गई है, जिसमें 20 से ज्यादा देश शामिल हो रहे हैं। पुतिन से मिलने का भी कार्यक्रम है, और दुनिया की निगाहें इस पर हैं कि क्या इस समिट से भारत-चीन के रिश्तों को नई दिशा मिलेगी।
लेकिन क्या यह समिट सिर्फ एक औपचारिकता है? या फिर यहाँ से कोई वास्तविक बदलाव आएगा? मोदी ने तो चीन की सफल अध्यक्षता के लिए बधाई दी और निमंत्रण के लिए धन्यवाद दिया, लेकिन असल सवाल यह है—क्या दोनों देश अपने मतभेदों को भुलाकर आगे बढ़ पाएंगे?
उम्मीदें, चुनौतियाँ, और एक नया रास्ता
मोदी-जिनपिंग की मुलाकात ने एक नई उम्मीद जगाई है। सीमा पर शांति, व्यापारिक सहयोग, और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के रास्ते खुल रहे हैं। लेकिन इतिहास सिखाता है कि भारत-चीन के रिश्ते हमेशा से जटिल रहे हैं। ड्रैगन और हाथी के साथ चलने का सपना तो अच्छा है, लेकिन इसके लिए दोनों देशों को वास्तविक विश्वास और समझदारी दिखानी होगी।
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