mathura shahi eidgah mosque not disputed high court order: इलाहाबाद HC ने हिंदू याचिका खारिज की, जानें कोर्ट के तर्क और केस की प्रमुख जानकारी
mathura shahi eidgah mosque not disputed high court order: इलाहाबाद High Court ने 5 मार्च की याचिका पर सोमवार को सुनवाई कर निर्णय सुनाया, जिसमें Shahi Eidgah Mosque को ‘विवादित ढांचा’ घोषित करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने Hindu petitioners की याचिका खारिज करते हुए बताया कि मस्जिद के पास कोई वैध जमीन दस्तावेज नहीं हैं और यह अतिक्रमित है, इसलिए इसे विवादित घोषित करना उचित नहीं।
कोर्ट के तर्क: बिना जमीन के कोई वैध दर्जा नहीं
हिंदू वकील महेंद्र प्रताप सिंह ने दावा किया कि मस्जिद की दीवारों पर हिंदू प्रतीकों के निशान हैं और वहां पहले मंदिर था। उन्होंने कहा कि मस्जिद की नामजद जमीन जिस खसरा‑खतौनी में दर्ज होनी चाहिए, वह नहीं है और नगर निगम या कर-रिकॉर्ड में भी इसका कोई ज़िक्र नहीं।
Single Bench (Justice Ram Manohar Narayan Mishra) ने चार बार कोरोना अवधि में सुनवाई की लेकिन अंततः निर्णय यह दिया कि बिना वैध कागजात के किसी भी ढांचे को विवादित घोषित नहीं किया जा सकता।
मुस्लिम पक्ष की दलील: 400 साल पुरानी पहचान
Muslim side की दलील रही कि ईदगाह मस्जिद का निर्माण 1670 में औरंगजेब द्वारा किया गया था और यह 400 वर्षों से मौजूदा रूप में है। उन्होंने याचिका को आधारहीन बताते हुए इसे ठोस तर्कों के साथ रद्द करने की मांग की।
“Shahi Eidgah 400 साल से धर्मस्थल के रूप में मौजूद है—इसे विवादित घोषित करें, यह गलत है।”
पार्श्वभूमि और अन्य केस अपडेट
- यह याचिका 5 मार्च को दाखिल की गई थी। इलाहाबाद HC ने 23 मई को निर्णय सुरक्षित रख लिया था।
- हिंदू पक्ष की अन्य 18 याचिकाएं भी जन्मभूमि–ईदगाह विवाद पर अलग से सुनवाई के तहत हैं।
- यह मामला अयोध्या Babri Masjid जैसी कानूनी स्थिति को ध्यान में रखते हुए दायर की गई एक पैटर्न याचिका है।
Watch Now :- भोपाल से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है..
Read More :- Pitra Dosh Nivaran in Sawan 2025: सावन में करें ये उपाय, पितृ दोष से मिलेगा छुटकारा!
