Mahaparinirvan Diwas 2025: हर साल बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में 6 दिसंबर को महापरिनिर्वाण दिवस मनाया जाता है। भारत के महान समाज सुधारक, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की आज 70वीं पुण्यतिथि है।
Mahaparinirvan Diwas 2025: महापरिनिर्वाण क्या है
महापरिनिर्वाण शब्द बौद्ध परंपरा से जुड़ा है, जिसका अर्थ आत्मा का अंतिम और पूर्ण शांति की अवस्था में प्रवेश। इसलिए यह दिन उनके जीवन के आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों पहलुओं को दर्शाता है।
बौद्ध साहित्य के अनुसार भगवान बुद्ध की मृत्यु को महापरिनिर्वाण माना जाता है, जिसका संस्कृत में अर्थ ‘मृत्यु के बाद निर्वाण‘ है। परिनिर्वाण को जीवन-संघर्ष, कर्म और मृत्यु तथा जन्म के चक्र से मुक्ति माना जाता है।
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Mahaparinirvan Diwas 2025: भीमराव अंबेडकर की जीवनी
डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में एक सैन्य छावनी में हुआ। वे अपने माता-पिता, रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई, की 14वीं और अंतिम संतान थे। उनके पिता भारतीय सेना में सूबेदार थे और कबीर पंथ के अनुयायी थे। अंबेडकर का परिवार महार जाति से था, जिसे उस समय अछूत माना जाता था। कहा जाता है कि बाबा साहब का असली नाम भिवा रामजी सकपाल था। बाद में उनके शिक्षक कृष्णा केशव अंबेडकर ने उनके उपनाम को आंबडवेकर से बदलकर अंबेडकर कर दिया।
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बाबासाहेब का निधन
लंबी बीमारी के बाद 6 दिसंबर 1956 को उनका निधन हो गया था। दिल्ली में नींद में ही उनका निधन हो गयाइससे कुछ समय पहले अक्टूबर 1956 में उन्होंने लाखों अनुयायियों के साथ नागपुर में बौद्ध धर्म स्वीकार किया था। उन्होंने लोगों को शांति, करुणा और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। ऐसे में उनकी पुण्यतिथि को देशभर में महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है।
” जातिवाद भेदभाव खत्म करना “
बाबा साहब भगवान बुद्ध की तरह काफी सदाचारी थे। बचपन से ही उन्हें जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा, उन्होंने अपने पूरा जीवन जातिवाद को खत्म करने और गरीब, दलित, पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। कहा जाता है कि वह अपने महान व सदाचारी जीवन की वजह से निर्वाण प्राप्त कर चुके थे। यही कारण है कि हर साल उनकी पुण्यतिथि को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है।
डॉ. आंबेडकर का प्रसिद्ध नारा
डॉ. आंबेडकर ने अपने विचारों और शिक्षा से दुनिया को प्रभावित किया। उनके विचार आज भी स्टूडेंट्स ही नहीं बल्कि हर किसी को प्रेरणा देते हैं। उनका प्रसिद्ध नारा था कि ‘आदर्श शिक्षित बनो, संगठित हो, संघर्ष करो।’ यह नारा उन्होंने सामाजिक जागरूकता, समान अधिकार और न्याय के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए दिया था।
