कर्नाटक हाईकोर्ट का चेतावनी: यूट्यूब पर बदनामी का बाजार!

बेंगलुरु: कर्नाटक हाईकोर्ट ने यूट्यूब और सोशल मीडिया पर झूठ और बदनामी के बढ़ते प्रचलन पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा—”लोग बेझिझक बदनाम कर रहे हैं और निजी जिंदगी में दखल दे रहे हैं। मानहानि कानून इसे रोकने के लिए काफी नहीं है।” यह बयान कन्नड़ प्रभा के एडिटर-इन-चीफ रवि हेगड़े की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिन्होंने मंत्री केजे जॉर्ज की ओर से दर्ज कराई गई मानहानि शिकायत को रद्द करने की मांग की थी।
कोर्ट का सवाल: “क्या मीडिया ने जांच की थी?”
अदालत ने मीडिया की जिम्मेदारी पर सवाल उठाते हुए कहा: “अखबार ने मंत्री पर लगे आरोपों की जांच की थी? क्या उनके पक्ष को रखा गया था? बिना जांच के आरोप प्रकाशित करना गलत है।”
कोर्ट ने रवि हेगड़े को सुझाव दिया कि वे अखबार में डिस्क्लेमर प्रकाशित करें, जिसमें लिखा हो कि “यह रिपोर्ट केवल किसी अन्य व्यक्ति के बयान पर आधारित थी।” ऐसा करने पर केस खत्म किया जा सकता है।
कोर्ट का सुझाव: दोनों पक्ष आपस में समझौता करें
रवि हेगड़े ने अदालत को बताया कि मध्यस्थता के दौरान उन्होंने फ्रंट पेज पर माफी छापने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन मंत्री जॉर्ज ने इसे ठुकरा दिया। इस पर कोर्ट ने कहा: “दोनों पक्ष आपस में समझौता करने की कोशिश करें। नहीं तो केस को फिर से मध्यस्थता के लिए भेजा जाएगा।”

यूट्यूब और मीडिया पर नियंत्रण की जरूरत
कर्नाटक हाईकोर्ट का यह बयान डिजिटल मीडिया पर नियंत्रण की मांग को मजबूत करता है। झूठ और बदनामी का बाजार यूट्यूब और सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। अब सवाल यह है कि क्या सरकार इस पर कड़े नियम बनाएगी? या फिर मीडिया और यूट्यूबर्स को स्वयं अनुशासन में रहना होगा?
Watch:- US ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया
