Karauli Chaturmukhi Shiv Temple: करौली शहर के हिंडौन दरवाजे के पास स्थित भूतेश्वर महादेव मंदिर एक बार फिर श्रद्धा और रहस्य का केंद्र बन गया है। करीब 250 साल पुराने इस चतुर्मुखी शिव मंदिर के कपाट 18 वर्षों बाद सावन मास में खोले गए।
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बताया जा रहा है कि, जब पट खोले गए और पूजा की गई उसी दौरान एक चमत्कारी सांप के दर्शन हुए, जिसने उपस्थित भक्तों को आश्चर्य में डाल दिया।
सदियों पुराना मंदिर, जो 18 सालों से था बंद…
यह मंदिर पुराने गर्ल्स कॉलेज परिसर में स्थित है और इसे नागा साधु की जीवित समाधि तथा चतुर्मुखी संगमरमर शिवलिंग के लिए जाना जाता है। कॉलेज के नए भवन में स्थानांतरण के बाद मंदिर उपेक्षित हो गया था और परिसर में झाड़ – झंखाड़ उग आए थे। मुख्य द्वार पर ताले लगे हुए थे और मंदिर वर्षों तक बंद रहा।

एसडीएम और नगर परिषद की पहल से शुरू हुआ पुनरुद्धार…
हाल ही में एसडीएम प्रेमराज मीना और नगर परिषद के अधिकारियों ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया और इसकी दुर्दशा देखकर तुरंत सफाई अभियान शुरू कराया गया। स्थानीय नागरिकों और संगठनों के सहयोग से मंदिर को फिर से श्रद्धालुओं के लिए खोला गया।
पूजा के दौरान हुआ सांप का चमत्कारिक आगमन…
श्रावण मास की पहली पूजा के दौरान जैसे ही वैदिक मंत्रोच्चार शुरू हुआ, तेज बारिश होने लगी। उसी समय एक 8-10 फीट लंबा सांप मंदिर परिसर में पहुंचा और शिवलिंग के पास रखे दूध को पी गया। इस सांप को पहले किसी ने नहीं देखा था, न सफाई के दौरान और न ही आस-पास। इसे भक्तों ने भगवान शिव की कृपा और चमत्कार माना।
ऐतिहासिक मान्यताएं: शराब लेकर नहीं गुजर सकते थे लोग…
स्थानीय लोगों के अनुसार यह स्थान जाटवाड़ी के ठाकुर सरदारों द्वारा स्थापित किया गया था। बुजुर्गों का मानना है कि मंदिर के सामने से यदि कोई शराब लेकर गुजरता था, तो उसकी बोतल अपने आप गिर जाती थी। यह स्थान वर्षों से नशामुक्ति का प्रतीक रहा है।
गुप्त गुफा जैसी संरचना और अद्भुत नक्काशी…
मंदिर में एक विशेष “गुम्मत” (गुप्त संरचना) मौजूद है, जिसमें ग्रहों की आकृतियां और रहस्यमयी चिह्न बने हुए हैं। भक्तों का विश्वास है कि इस स्थान में आध्यात्मिक शक्तियों का वास है और इसके भीतर प्राचीन रहस्य छिपे हो सकते हैं।

चतुर्मुखी शिवलिंग और श्वेत पद्मासन की अद्वितीयता…
भूतेश्वर महादेव मंदिर की सबसे खास बात यहां स्थापित भगवान शिव की चतुर्मुखी संगमरमर शिवलिंग है। यह प्रतिमा श्वेत पद्मासन पर विराजित है, जो पुराणों में वर्णित अत्यंत दुर्लभ स्वरूपों में से एक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चतुर्मुखी शिवलिंग भगवान शिव के चार प्रमुख स्वरूपों का प्रतीक होता है, जो सृष्टि, पालन, संहार और मोक्ष से जुड़ा है।
करौली की आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक…
करौली को “छोटी काशी” भी कहा जाता है क्योंकि यहां सैंकड़ों मंदिर स्थित हैं। सावन में बैठा हनुमान मंदिर, पंचानन महादेव और चिंताहरण हनुमान मंदिर जैसे स्थलों पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है। अब भूतेश्वर महादेव मंदिर भी श्रद्धा का नया केंद्र बन चुका है।
