Kanker Naxalites surrender : छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नक्सल प्रभावित माड़-डिवीजन से एक बड़ी सामने आई है। 21 नक्सलियों ने शांति का रास्ता अपनाते हुए पुलिस और प्रशासन के सामने सरेंडर किया। इन्हीं में से 18 नक्सलियों ने अपने हथियार डाल दिए। सरेंडर के समय ग्रामीणों और मांझियों (ग्राम प्रमुखों) ने उन्हें गुलाब के फूल भेंट कर समाज की मुख्यधारा में स्वागत किया।
नक्सली गतिविधियां
कांकेर का माड़-डिवीजन लंबे समय से नक्सलियों का गढ़ माना जाता रहा है। इस साल मई और जून के दौरान इस क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों में तेजी आई थी। सुरक्षा बलों पर हमले हुए और ग्रामीणों में भय का माहौल बना था। लेकिन सुरक्षा अभियानों और प्रशासनिक संवाद के चलते नक्सलियों में धीरे-धीरे सरेंडर की प्रवृत्ति बढ़ी है।
बीते तीन महीनों में यह चौथा बड़ा सरेंडर अभियान है, जिससे साफ है कि नक्सल आंदोलन कमजोर होता जा रहा है।
छिपे नक्सली भी आएं मुख्यधारा में- आईजी
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने इस मौके पर कहा कि यह आत्मसमर्पण सरकार के पुनर्वास और भरोसे की नीति का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जो नक्सली अब भी जंगलों में छिपे हैं, वे हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में आएं। सरकार उन्हें जीवन सुधारने का हर अवसर देगी।
आईजी ने कहा,कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में कई पर पुलिस थानों में अपराधों के मामले दर्ज थे। इनमें आठ पुरुष और तेरह महिलाएं शामिल हैं, जो डेढ़ से दस वर्षों तक नक्सल गतिविधियों में सक्रिय रहे।
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पुनर्वास नीति
राज्य सरकार द्वारा जारी पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता, आवास, रोजगार प्रशिक्षण और शिक्षण का अवसर दिया जाएगा। कांकेर पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल ने बताया कि कई नक्सलियों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजने की इच्छा जताई है, जो सकारात्मक संकेत है।
ग्रामीणों का बदलता नजरिया
इस आत्मसमर्पण कार्यक्रम में इलाके के गांवों से सैकड़ों लोग शामिल हुए। ग्रामीणों ने लंबे समय बाद राहत की सांस ली और नक्सलियों के समाज में लौटने के फैसले का स्वागत किया। मांझियों ने गुलाब और साफा पहनाकर नक्सलियों को अपनाने की मिसाल पेश की।
सर्च ऑपरेशन जारी
कांकेर का यह सरेंडर अभियान माड़ और आसपास के इलाकों में नक्सलवाद के लगातार कमजोर पड़ने का संकेत देता है। पिछले एक वर्ष में 70 से अधिक नक्सलियों ने अपनी हथियारबंद गतिविधियां छोड़ी हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आने वाले महीनों में और भी नक्सली आत्मसमर्पण कर सकते हैं, क्योंकि जंगलों में सुरक्षा बलों की पकड़ मजबूत हो चुकी है और स्थानीय समर्थन घट रहा है।
