Judge cash scandal Supreme Court: जज कैश कांड को लेकर चल रही कानूनी हलचल फिलहाल थम गई है सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, हालांकि कोर्ट ने उन्हें एक अहम मोर्चे पर राहत देने से साफ इनकार कर दिया ।
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जवाब के लिए समय बढ़ाने से मना
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने दो दिन तक चली सुनवाई के बाद गुरुवार को फैसला सुरक्षित रखा, साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि संसदीय समिति के सामने जवाब दाखिल करने की समय-सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी ।जस्टिस वर्मा को अब 12 जनवरी को ही पार्लियामेंट्री कमेटी के सामने अपना पक्ष रखना होगा ।
महाभियोग प्रस्ताव को दी थी चुनौती
दरअसल जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, उनकी दलील है कि महाभियोग प्रस्ताव दोनों सदनों में पेश तो हुआ लेकिन राज्यसभा ने इसे मंजूरी नहीं दी ।
इसके बावजूद लोकसभा ने अकेले ही जांच समिति गठित कर दी जो उनके अनुसार संविधान और प्रक्रिया के खिलाफ है, याचिका में कहा गया है कि जब दोनों सदनों की सहमति नहीं है तो जांच समिति का गठन ही सवालों के घेरे में है ।
कोर्ट ने पहले ही जताई थी प्रक्रिया पर आपत्ति
इससे एक दिन पहले 6 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी कि जांच समिति के गठन में कुछ प्रक्रियात्मक खामियां नजर आती हैं, हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा था कि वह यह परखेगा कि ये खामियां इतनी गंभीर हैं या नहीं कि पूरी कार्यवाही को रद्द किया जा सके ।
आग जले नोट और तबादला: कैसे शुरू हुआ मामला
यह पूरा मामला 14 मार्च को सामने आया था जब दिल्ली में जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास के स्टोर रूम में आग लग गई । आग बुझाने के बाद वहां से 500-500 रुपये के जले हुए नोटों के बंडल मिले थे । इस घटना के बाद न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई । बाद में जस्टिस वर्मा का तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया यह तस्वीर 14 मार्च की है जब आग लगने के बाद जस्टिस वर्मा के घर से जले हुए नोट बरामद हुए थे ।
