तेल की कीमतें बढ़ेगी?
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का असर साफ नजर आया। इस युद्ध का असर भारतीय इक्विटी बाजारों पर ट्रेड फ्लो में रुकावट और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी के ज़रिए पड़ने वाला ह। ईरान ने जंग शुरू होते ही फारस की खाड़ी में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया था। यानी इस रास्ते से अब कोई भी समुद्री जहाज नहीं जा सकता, जब तक ईरान की ओर से नया आदेश जारी नहीं किया जाता। इसके साथ ही ईरान अमेरिकी बेस को निशाना बना रहा है।

एक्स्ट्रा इंपोर्ट कॉस्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के साथ भारत का सीधा आर्थिक कनेक्शन सीमित है, और दोनों देशों के बीच सालाना लगभग USD 1.7 बिलियन का व्यापार है, लेकिन बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय अस्थिरता एक बड़ा रिस्क होता है। जंग के दौरान भारत एक बड़ा कच्चा तेल इंपोर्टर होने के नाते, तेल की बढ़ती कीमतों से काफी फाइनेंशियल दबाव का सामना कर रहा है। बर्नस्टीन की रिपोर्ट में कहा गया कि तेल की कीमतों में USD 10 प्रति बैरल की बढ़ोतरी का मतलब है सालाना लगभग USD 12-13 बिलियन का एक्स्ट्रा इंपोर्ट कॉस्ट।
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War Impact on India: सोने के भाव
जब-जब दुनिया में युद्ध होता है, तो निवेशक सोने की तरफ शिफ्ट हो जाते हैं। भारत में शादी-ब्याह के सीजन के बीच सोने की कीमतें नया रिकॉर्ड बना सकती हैं। सोने के दाम बढ़ सकते है। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से सोना दूसरे देशों से खरीदना महंगा होगा, जिसका सीधा असर रिटेल कीमतों पर पड़ेगा। साथ ही डीजल-पेट्रोल की कीमतें भी बढ़ सकती है।

6 अमेरिकी ठिकानों पर हमला
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के हमलों में मिडिल ईस्ट में मौजूद कम से कम 6 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान ने बहरीन, इराक, UAE और कुवैत में स्थित अमेरिकी बेस पर हमला किया। इन हमलों में मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया है। साइप्रस में ब्रिटिश एयरफोर्स के अकरोतिरी बेस पर ड्रोन हमले के कुछ घंटे बाद फिर सायरन बजे हैं। इधर, कतर के रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि देश में 2 मिसाइल हमलों में ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। एक मिसाइल ने मेसाईद एनर्जी प्लांट के वॉटर स्टोरेज टैंक को निशाना बनाया, जबकि दूसरी मिसाइल रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में स्थित कतर एनर्जी से संबद्ध ऊर्जा सुविधा पर गिरी।
