बात सिर्फ फोन की नहीं, जुनून की है…
iphone 17 pro booking हर साल की तरह इस बार भी वही नज़ारा Apple का नया iPhone लॉन्च हुआ, और चंद घंटों में ही टॉप मॉडल्स की शॉर्टेज शुरू!

iPhone 17 Pro और Pro Max की बुकिंग भारत में शुरू होते ही लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। रिटेलर्स कह रहे हैं कि अगर आपने अभी ऑर्डर नहीं किया, तो कम से कम एक हफ्ते रुकना पड़ेगा, शायद उससे भी ज़्यादा।
पर सवाल उठता है — ये हर साल क्यों होता है? क्या Apple जानबूझकर सीमित स्टॉक भेजता है या फिर ये सिर्फ एक डिमांड-सप्लाई की कहानी है?
रिटेलर्स की जुबानी: प्रो मॉडल मिलना मुश्किल है, भाई!
मुंबई के एक बड़े Apple रिटेलर ने कहा,
“हमने 500 फोन मंगवाए, जिनमें सिर्फ 50 Pro और 10 Pro Max मॉडल आए। बाकी सब बेस मॉडल्स हैं, जिन्हें ग्राहक लेना ही नहीं चाहता।”
इस बार की खास बात यह है कि Apple ने भारत में अपने रिटेल नेटवर्क को 500 शहरों तक फैला दिया है। अब हर जगह फोन भेजे जा रहे हैं, लेकिन इससे प्रो मॉडल्स की यूनिट्स बहुत ज्यादा बंट गईं।
बेंगलुरु, दिल्ली और पुणे जैसे शहरों के रिटेलर्स भी यही कह रहे हैं —
“हमारा स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है।”
ब्लैक मार्केट की चांदी: 10-20% तक बढ़ी कीमतें
जैसे ही किसी चीज़ की डिमांड बढ़ती है और सप्लाई कम होती है, ब्लैक मार्केट एक्टिव हो जाता है।
अब iPhone 17 Pro की असल कीमत भले 1.39 लाख हो, लेकिन कुछ चुनिंदा ऑफलाइन स्टोर्स और रीसेलर्स इसे 1.5 लाख से ऊपर में बेच रहे हैं।
“कस्टमर बोलता है कि बस फोन चाहिए, कीमत की चिंता नहीं।”
– दिल्ली के एक ऑफलाइन एप्पल डीलर ने कहा।
भारत में बनते हुए भी क्यों नहीं मिलते Pro मॉडल?
यह बात थोड़ी हैरान करती है —
भारत में iPhone बन रहे हैं, फिर भी यहां स्टॉक की कमी क्यों?
इसका जवाब Apple की इंटरनल स्ट्रैटेजी में छिपा है:
- शुरुआत में Apple बेस मॉडल्स पर फोकस करता है, क्योंकि वो ज्यादा मात्रा में बिकते हैं।
- प्रो मॉडल्स की प्रोडक्शन लॉन्च के कुछ हफ्तों बाद तेज़ होती है, जब कंपनी को असली डिमांड का अंदाज़ा होता है।
- भारत में बने iPhones में से कई यूरोपियन मार्केट्स को एक्सपोर्ट कर दिए जाते हैं।
रिटेलर्स की हालत: डिमांड ज्यादा, माल कम
ऐसे समय में सबसे ज्यादा परेशानी उन रिटेलर्स को होती है जो प्री-बुकिंग ले चुके होते हैं।
ग्राहक रोज़ फोन करके पूछता है —
“भाई, मेरा प्रो मॉडल कब आएगा?”
रिटेलर्स के पास जवाब नहीं होता। वे मजबूर होकर ग्राहकों को बेस मॉडल्स की तरफ मोड़ते हैं, लेकिन सभी ग्राहक तैयार नहीं होते। खासकर वो जो 512GB या 1TB जैसे वेरिएंट चाहते हैं।
क्या आगे राहत मिलेगी?
Apple के डिस्ट्रीब्यूटर्स का दावा है कि 19 सितंबर को बिक्री के दिन तक दूसरा बैच भी आ सकता है, लेकिन अभी तक पहला स्टॉक ही 40% कम है, पिछले साल के मुकाबले।
कुछ रिटेलर्स मानते हैं कि जैसे-जैसे हफ्ते बीतेंगे, प्रो मॉडल्स की उपलब्धता बेहतर हो जाएगी। लेकिन लॉन्च का “हाईप पीक मोमेंट” तब तक निकल चुका होगा।
iPhone खरीदना अब तकनीक नहीं, एक भावना बन चुका है
भारत में iPhone सिर्फ एक फोन नहीं, स्टेटस सिंबल है।
प्रो मॉडल्स की चाहत सिर्फ फीचर्स के लिए नहीं, बल्कि उस एक्सक्लूसिव फील के लिए है जो कहता है:
“मैं बाकी लोगों से अलग हूं।”
और शायद इसी चाहत को Apple हर साल बड़ी चालाकी से मैनेज करता है — कम स्टॉक भेजो, मांग बनाओ, एक्सक्लूसिविटी बेचो।
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