india census 2027 : सोचिए एक दिन ऐसा आए जब हर घर, हर व्यक्ति और हर पहचान को गिना जाए। 2027 की जनगणना उसी भव्य प्रयास की अगली कड़ी है।
और पहला कदम रखा गया है 10 से 30 नवम्बर तक एक प्री‑टेस्ट, जिसमें हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस पर फोकस किया जाएगा।
यह परीक्षा सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि देश की आत्मा और पहचान की तैयारी है।
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हालांकि, जब सरकार ने जून महीने में जनगणना के लिए गज़ेट जारी किया, तब से ही सवाल हैं क्या हमें यह मापदंड स्वीकार्य है? क्या यह बदलाव हमारे समाज को बाध्य करेगा या आज़ादी देगा? इन सवालों के बीच, पहला प्री‑टेस्ट हमें आम जिंदगी की असलियत दिखाने का प्रयास करेगा।
प्री‑टेस्ट सिर्फ अभ्यास नहीं, अभ्यास में परीक्षा
प्री‑टेस्ट का मकसद है
- डेटा संग्रह के तरीके आज़माना
- लॉजिस्टिक चुनौतियों को समझना
- डिजिटल टूल्स और मोबाइल ऐप की कार्यक्षमता देखना
- फील्ड टीमों की ट्रेनिंग परखे जाना
यानी, यह सिर्फ “परीक्षा” नहीं, बल्कि जानने का टूल है यह बताने के लिए कि असल जनगणना में कहाँ दिक्कत होगी।
दो चरणों में पूरा सर्वे
गृह मंत्रालय ने 16 जून 2025 को गजट जारी किया जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि जनगणना 2027 दो चरणों में होगी।
- हाउसलिस्टिंग ऑपरेशन (HLO): घरों की स्थिति, सुविधाएँ, संपत्ति आदि आंकना
- पॉपुलेशन एन्यूमरेशन (PE): प्रत्येक सदस्य की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक जानकारी इकट्ठा करना
देशभर की अधिकतर जगहों में अनुमानित संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 है। लेकिन हिमालयी और बर्फबारी वाले इलाकों जैसे लद्दाख, जम्मू‑कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए 1 अक्टूबर 2026 को संदर्भ तिथि रखी गई है।
पहली बार: डिजिटल और सेल्फ‑एन्यूमरेशन
2027 की जनगणना सिर्फ बड़े पैमाने की नहीं होगी यह डिजिटल Census होगी। मोबाइल ऐप्स, सेल्फ‑एन्यूमरेशन ऑप्शन, डेटा ट्रांसमिशन की सुरक्षा ये सब इस बार नई चुनौतियाँ हैं। सरकार ने यह भी कहा है कि मजबूत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित होगी ताकि डेटा चोरी या हेरफेर की आशंका न हो।
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चुनौतियाँ और चिंताएँ
- भौगोलिक दुष्करता: पहाड़ी और दूरस्थ इलाके मौसम कारणों से कठिनाई पैदा करेंगे।
- सामाजिक झिझक: कई लोग घर पर सर्वेक्षक आने से डर सकते हैं या आंकड़े देना न चाहें।
- डिजिटल लैंगिक विभाजन: मोबाइल ऐप और सेल्फ एन्यूमरेशन तकनीक सभी को सहज नहीं लगेगी।
- डेटा सुरक्षा: कितनी सुरक्षा, कितना गोपनीय यह भरोसा जीतना कठिन है।
